ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिका पर बातचीत को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस विवाद का असर अब पूरी दुनिया के तेल बाजार और व्यापार पर दिखने लगा है।

ईरान ने अमेरिका के सामने क्या शर्तें रखीं?

ईरान ने युद्ध खत्म करने, अमेरिकी नाकाबंदी हटाने और अपनी जमी हुई संपत्ति वापस लेने की मांग की। इसके अलावा ईरान ने Strait of Hormuz पर पूरी संप्रभुता और युद्ध के मुआवजे की बात कही। परमाणु मुद्दे पर ईरान ने कुछ यूरेनियम को कम करने और बाकी को किसी तीसरे देश में भेजने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि ईरान ने अपनी परमाणु सुविधाओं को हटाने से साफ इनकार कर दिया है।

Strait of Hormuz विवाद का आम लोगों और भारत पर क्या असर होगा?

Strait of Hormuz तेल व्यापार के लिए सबसे अहम रास्ता है और यहाँ तनाव की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति में बड़ी गिरावट आई है। सऊदी अरब की कंपनी Aramco के सीईओ ने बताया कि इस झटके से उबरने में 2027 तक का समय लग सकता है। भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर इस समुद्री रास्ते से जुड़ी है।

बातचीत की क्या स्थिति है और कौन बीच-बचाव कर रहा है?

पाकिस्तान और कतर इस समय ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के प्रस्ताव को ‘कचरा’ बताकर खारिज कर दिया है जिससे युद्धविराम अब खतरे में है। ब्रिटेन और फ्रांस 12 मई 2026 को रक्षा मंत्रियों की एक बैठक करने जा रहे हैं ताकि व्यापारिक रास्तों को फिर से सुरक्षित बनाया जा सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर क्या अपडेट है?

प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता फिलहाल युद्ध खत्म करना है और परमाणु चर्चाएं समय आने पर होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और इसराइल के हमलों की वजह से IAEA की निगरानी खत्म हो गई है।

क्या अमेरिका ने ईरान की शर्तें मानीं?

नहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के शांति प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और इसे ‘कचरा’ करार दिया, जिससे दोनों देशों के बीच बातचीत बंद होने की कगार पर है।