ईरान ने अमेरिका के मिलिट्री बेस को निशाना बनाने के लिए चीन की जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल किया है. Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गुप्त तरीके से ईरान ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की जानकारी जुटाई. इस खबर के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
चीन की कंपनी ने कैसे की मदद?
चीन की MizarVision नाम की कंपनी ने ईरान को हाई-रिजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरें मुहैया कराईं. इन तस्वीरों में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल किया गया था, जिससे अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों और उनके बुनियादी ढांचे की पहचान करना बहुत आसान हो गया. इस तकनीक की मदद से ईरान ने बहुत तेज़ी से सैन्य ठिकानों को ट्रैक किया.
अमेरिकी अधिकारियों का क्या कहना है?
अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) के अधिकारियों ने बताया कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स इस डेटा का इस्तेमाल मिसाइल और ड्रोन हमलों की प्लानिंग के लिए कर रही है. वहीं, FBI के एक अधिकारी ने साफ किया कि अमेरिका ऐसी जासूसी को बर्दाश्त नहीं करेगा और उसकी टीमें विदेशी एजेंटों को रोकने के लिए काम कर रही हैं.
घटनाक्रम की पूरी जानकारी
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 21 फरवरी 2026 | MizarVision ने अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों की सटीक जानकारी सार्वजनिक की |
| 9 अप्रैल 2026 | ईरान द्वारा AI-युक्त सैटेलाइट तस्वीरों के इस्तेमाल की खबरें आईं |
| 10 अप्रैल 2026 | DIA अधिकारी ने पुष्टि की कि ईरान MizarVision का उपयोग कर रहा है |
| 15 अप्रैल 2026 | Financial Times और Reuters ने आधिकारिक तौर पर इस जासूसी की रिपोर्ट छापी |
