ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बाद अब यूरोपीय देशों ने भी प्रतिबंध हटाने की बात कही है। इस पर ईरान के वियना दूतावास ने साफ़ कर दिया है कि चार यूरोपीय देशों द्वारा प्रतिबंध हटाना तेहरान के लिए कोई अहसान नहीं है। यह पूरा मामला दुनिया की नजरों में है क्योंकि इससे मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद जगी है।
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पूरा मामला 15 जून 2026 से शुरू हुआ जब इटली, फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम ने एक साझा बयान जारी किया। इन देशों ने कहा कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम में साफ़ और जांचे जा सकने वाले कदम उठाता है, तो वे इससे जुड़े प्रतिबंध हटाने के लिए तैयार हैं। यूरोपीय देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया और इस बातचीत को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान और कतर जैसे मध्यस्थ देशों का शुक्रिया अदा किया।
होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर जोर
यूरोपीय देशों ने इस बात पर काफी जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जल्द से जल्द फिर से खोला जाए ताकि जहाजों का आना-जाना बिना किसी रोक-टोक के हो सके। उन्होंने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और समुद्री माइन्स को हटाने के लिए मदद देने की पेशकश भी की। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने G7 समिट में बताया कि अमेरिका-ईरान समझौते के तहत इस जलमार्ग को लंबे समय के लिए खोलने पर चर्चा हुई है। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता और युद्ध खत्म करने की दिशा में एक बहुत जरूरी कदम बताया।
19 जून को होगा समझौता साइन
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) ने जानकारी दी कि अमेरिका और तेहरान के बीच 15 जून को एक समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था। इसका मकसद लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को खत्म करना है। इस समझौते पर आधिकारिक तौर पर शुक्रवार, 19 जून को हस्ताक्षर होंगे। काउंसिल ने यह भी कहा कि अंतिम समझौते के लिए आगे की बातचीत तभी होगी जब दूसरा पक्ष अपने वादों को पूरा करेगा।
दूसरी तरफ, अमेरिका के एक अधिकारी ने ईरान के उन दावों को गलत बताया जिसमें अरबों डॉलर के फ्रीज फंड्स को रिलीज करने की बात कही गई थी। अमेरिकी अधिकारी ने साफ़ किया कि फंड्स का भुगतान केवल तब होगा जब ईरान समझौते की शर्तों को पूरा करेगा।