Strait of Hormuz: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर किया बड़ा ऐलान, अमेरिका के सामने झुकने से किया साफ इनकार

ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है और कहा है कि वह किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा। ईरान के एक्सपेडिसीमेंट काउंसिल के चेयरमैन और पूर्व मुख्य न्यायाधीश Ayatollah Sadegh Amoli Larijani ने रविवार, 9 अगस्त 2026 को यह ऐलान किया कि यह जलडमरूमध्य अब युद्ध से पहले जैसी स्थिति में वापस नहीं लौटेगा। ईरान की सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB के मुताबिक, तेहरान इस मामले में अपने रुख पर पूरी तरह कायम है और मौजूदा तनाव के बीच किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है।
अमेरिका के सामने ईरान ने रखी ये शर्तें
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने आधिकारिक रूप से यह बयान दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक कि अमेरिका अपने व्यवहार में सुधार नहीं करता। काउंसिल के सचिव और रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर Mohammad Bagher Zolghadr ने इस बात को दोहराया कि जब तक तेहरान की सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक इस रास्ते को बंद रखा जाएगा। ईरान की इन शर्तों में अमेरिका का ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ युद्ध हमेशा के लिए खत्म करना, धमकियां देना बंद करना, ईरानी बंदरगाहों से नौसैनिक नाकेबंदी हटाना और उस इलाके से अमेरिकी सेना को पूरी तरह वापस बुलाना शामिल है। इसके अलावा युद्ध के नुकसान का पूरा मुआवजा देना, प्रतिबंधों को हटाना और फ्रीज की गई संपत्तियों को बिना किसी शर्त के जारी करना भी इन मांगों में शामिल है। IRGC के प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि जब तक दुश्मनों को शिकस्त नहीं मिल जाती, तब तक उनकी रणनीति हमेशा जारी रहने वाले प्रतिरोध की है और वे इस जलडमरूमध्य को युद्ध का मैदान मानते हैं।
ओमान के जरिए हो रही है बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने रविवार को यह पुष्टि की कि नए शिपिंग रूट्स और जलडमरूमध्य के मैनेजमेंट को लेकर ओमान के साथ बातचीत अब अंतिम चरणों के करीब पहुंच रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस रास्ते को पूरी तरह से दोबारा खोलने का मामला अभी भी अन्य शर्तों और पिछले जून के समझौते के उल्लंघन के मुआवजे से जुड़ा हुआ है। विदेश मंत्री ने बताया कि ईरान सीधे तौर पर अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं कर रहा है, बल्कि बिचौलियों के माध्यम से केवल संदेशों का आदान-प्रदान किया जा रहा है। ईरान ने फरवरी के आखिर से होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकेबंदी कर रखी है, जिसे वह अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद का कदम बताता है और अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने की योजना बना रहा है।
खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव और यूएई का बयान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्रीय तनाव में और ज्यादा बढ़ोतरी हो गई है, जब शनिवार, 8 अगस्त 2026 को संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने ईरान पर एक गंभीर आरोप लगाया। यूएई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उसके एक ADNOC टैंकर को निशाना बनाया गया है, जिससे वहां की सुरक्षा स्थिति और ज्यादा चिंताजनक हो गई है। खाड़ी देशों में लगातार बढ़ रहे इस तनाव का असर वहां रहने वाले आम लोगों और कामगारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।