ईरान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट Mohammad Reza Aref ने 28 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया है कि ईरान युद्ध की तलाश में नहीं है, लेकिन अगर उस पर कोई युद्ध थोपा गया तो वे अपना बचाव प्रभावी ढंग से करेंगे। तेहरान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देश की मजबूती और पुरानी चुनौतियों से पार पाने की क्षमता पर जोर दिया।

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तनाव के बीच कूटनीतिक कोशिशें

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने ओमान और सऊदी अरब के अधिकारियों के साथ Strait of Hormuz की सुरक्षा को लेकर चर्चा की है। उन्होंने मौजूदा अस्थिरता के लिए अमेरिका की आक्रामक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान के सैन्य मुख्यालय, Khatam al-Anbia, ने यह भी चेतावनी दी है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को युद्ध का विस्तार माना जाएगा।

युद्धविराम पर ईरान का रुख

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने बताया कि अमेरिका के साथ मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। उन्होंने साफ किया कि ईरान ने अभी तक बातचीत या युद्धविराम की मांग नहीं की है। फिलहाल 28 फरवरी 2026 से चल रहे इस युद्ध के बीच तीन दिनों से सैन्य हमलों में एक अस्थायी शांति देखी जा रही है। पाकिस्तान की मदद से हो रही इन अप्रत्यक्ष वार्ताओं का मकसद तेल निर्यात को फिर से शुरू करना और प्रतिबंधों में ढील पाना है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शांति वार्ता को लेकर उम्मीद जताई है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि कूटनीति नाकाम होने पर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है।

Sushma Kumari

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