ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही तनातनी के बीच एक बड़ा संदेश भेजा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance के साथ बातचीत करना चाहता है। ईरान का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के करीबी Steve Witkoff और उनके दामाद Jared Kushner के साथ बातचीत करने से कोई ठोस नतीजा नहीं निकलेगा। ईरान ने इसके पीछे पुराने अनुभवों और भरोसे की कमी का हवाला दिया है। यह जानकारी बैक चैनल यानी गुप्त रास्तों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई गई है।

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ईरान आखिर JD Vance से ही क्यों करना चाहता है बात?

ईरानी अधिकारियों का मानना है कि JD Vance चल रहे युद्ध और तनाव को खत्म करने के प्रति अधिक सकारात्मक नजरिया रखते हैं। ईरान को लगता है कि वेंस के साथ बातचीत ज्यादा फलदायी हो सकती है क्योंकि वह संघर्ष को खत्म करने के पक्ष में दिखते हैं। दूसरी तरफ, Steve Witkoff और Jared Kushner पर ईरान को बिल्कुल भी भरोसा नहीं है।

ईरान ने आरोप लगाया है कि जब पिछली बार परमाणु समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी, तब इन लोगों ने ईरान को धोखे में रखा था। ईरान का कहना है कि जब बातचीत चल रही थी, उसी समय अमेरिका और Israel सैन्य हमले की योजना बना रहे थे। इसी वजह से ईरान अब इन पुराने चेहरों के साथ मेज पर बैठने को तैयार नहीं है।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की ताजा स्थिति क्या है?

राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में कहा था कि ईरान के साथ बातचीत बहुत अच्छी और सकारात्मक रही है। उन्होंने यह भी साफ किया है कि अमेरिका की तरफ से कौन बातचीत करेगा, यह फैसला वह खुद लेंगे। फिलहाल पाकिस्तान, Oman, तुर्की और मिस्र जैसे देश इस समय दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान ने तो आधिकारिक तौर पर अपने देश में बातचीत की मेजबानी करने का प्रस्ताव भी दिया है। हालांकि, ईरान के कुछ वरिष्ठ नेता अभी भी सीधे बातचीत की खबरों को गलत बता रहे हैं और अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।

ईरान-अमेरिका वार्ता से जुड़ी मुख्य बातें

विषय विवरण
ईरान की पहली पसंद उपराष्ट्रपति JD Vance
ईरान की नापसंद Steve Witkoff और Jared Kushner
मध्यस्थ देश पाकिस्तान, ओमान, तुर्की और मिस्र
ट्रंप का दावा ईरान ने तेल और गैस से जुड़ा बड़ा ऑफर दिया है
ताजा सैन्य स्थिति ईरान और इजरायल के बीच हमलों का दौर जारी है

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कहा है कि अमेरिका मीडिया के जरिए बातचीत नहीं करेगा क्योंकि यह एक संवेदनशील मामला है। इस बीच रिपोर्ट आई है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सेना की एक टुकड़ी तैनात करने की तैयारी में है। ईरान और इजरायल के बीच जारी हमलों ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे कूटनीतिक रास्तों की तलाश तेज हो गई है।