फ्रांस में आयोजित World Policy Conference के दौरान UAE के अधिकारी डॉ. अनवर गर्गाश ने ईरान युद्ध के असर पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि जिन मुद्दों की वजह से यह संघर्ष शुरू हुआ, उन्हें लंबे समय तक टाला गया था। UAE हमेशा से कूटनीति और बातचीत को ही सही रास्ता मानता रहा है, लेकिन मौजूदा हालात ने सबकी चिंता बढ़ा दी है।

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जिनेवा में क्यों टूटी ईरान और अमेरिका की बातचीत?

फरवरी 2026 के अंत में जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता से ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता का तीसरा दौर चला था। 27 फरवरी को यह वार्ता टूट गई, जिसके बाद यह साफ हो गया कि फिलहाल कूटनीतिक प्रयास विफल हो चुके हैं। ईरान ने अमेरिकी मांगों को कम करके आंका, जिसकी वजह से बातचीत का रास्ता बंद हो गया और आने वाले हफ्तों में इसके गंभीर असर दिख सकते हैं।

इस विवाद में किन देशों की क्या भूमिका रही?

  • ओमान: ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अलबुसैदी ने मध्यस्थ के रूप में जिनेवा में दोनों पक्षों को मिलाने की कोशिश की।
  • ईरान: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने इस दौर की बातचीत को अब तक का सबसे लंबा और गंभीर दौर बताया था।
  • अमेरिका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।
  • UAE: डॉ. अनवर गर्गाश ने स्पष्ट किया कि UAE हमेशा बातचीत का समर्थन करता है, लेकिन वार्ता टूटने से अब भविष्य को लेकर चिंता है।