ईरान में हुए युद्ध से भारी तबाही हुई है और वहां की सरकार ने इसके शुरुआती नुकसान का आंकड़ा 270 अरब डॉलर बताया है। ईरान अब इस नुकसान की भरपाई के लिए खाड़ी देशों की तरफ देख रहा है। सरकार ने सऊदी अरब और UAE समेत पांच पड़ोसी देशों से मुआवज़े की मांग की है।

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किन देशों से मुआवज़े की मांग की गई है?

ईरान के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि Amir Saeed Iravani ने इस मामले में यूएन महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में निम्नलिखित देशों से material और moral नुकसान की भरपाई करने को कहा गया है:

  • सऊदी अरब
  • यूएई (UAE)
  • बहरीन
  • कतर
  • जॉर्डन

ईरान का कहना है कि इन देशों ने न केवल अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए होने दिया, बल्कि कुछ मामलों में उन्होंने खुद भी नागरिक ठिकानों पर होने वाले अवैध हमलों में हिस्सा लिया।

अमेरिका और ईरान के बीच क्या स्थिति है?

ईरान और अमेरिका के बीच विवाद सुलझाने के लिए 11 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हुई थी। हालांकि, 12 अप्रैल को अमेरिकी उपराष्ट्रपति Jay Di Vance ने बताया कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।

इससे पहले 8 अप्रैल की रात को डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते के युद्धविराम (Ceasefire) का ऐलान किया था। लेकिन इसके बाद ट्रंप ने अचानक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की पूरी नाकेबंदी कर दी। अब अमेरिकी नौसेना उन सभी जहाजों को ट्रैक कर रही है और उन्हें पकड़ रही है जो ईरान को पैसे देकर इस रास्ते से गुज़रने की कोशिश कर रहे हैं।

नुकसान के आंकड़े और आधिकारिक बयान

ईरानी सरकार की प्रवक्ता Fatima Muhajirani ने 14 अप्रैल 2026 को बताया कि युद्ध से हुए नुकसान का शुरुआती अनुमान 270 अरब डॉलर है। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह आंकड़ा अभी अंतिम नहीं है और इसमें बदलाव हो सकता है। यह पूरा विवाद अमेरिका और इसराइल के गठबंधन द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.