Energy Crisis: ईरान युद्ध से दुनिया में आया अब तक का सबसे बड़ा एनर्जी संकट, IEA ने दी चेतावनी

पूरी दुनिया इस वक्त एक बहुत बड़े एनर्जी संकट से गुज़र रही है। International Energy Agency (IEA) के मुताबिक, ईरान युद्ध की वजह से दुनिया इतिहास के सबसे बुरे ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। IEA के चीफ फतिह बिरोल ने कहा कि यह संकट 1973 और 1979 जैसे पुराने संकटों से भी कहीं ज़्यादा खतरनाक है। इसका सीधा असर तेल की सप्लाई और कीमतों पर पड़ रहा है।

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ईरान युद्ध का तेल सप्लाई पर क्या असर हुआ है?

यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इसके बाद 4 मार्च 2026 को ईरान ने Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए बंद कर दिया। इस वजह से सऊदी अरब, UAE, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन और इराक जैसे सात खाड़ी देशों से रोज़ाना लगभग 13 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन बंद हो गया है। IEA ने बताया कि जिन तेल प्लांटों को नुकसान पहुँचा है, उन्हें दोबारा ठीक करने में 2 साल से भी ज़्यादा का समय लग सकता है।

आम लोगों और प्रवासियों के लिए यह संकट क्यों गंभीर है?

इस संकट का असर आने वाले दिनों में हवाई यात्रा और खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों पर दिख सकता है। यूरोप में जेट फ्यूल की भारी कमी हो सकती है, जिससे कई फ्लाइट्स रद्द होने का डर है। फिलीपींस ने पहले ही नेशनल एनर्जी इमरजेंसी घोषित कर दी है और पाकिस्तान में भी कड़े कदम उठाए गए हैं। तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए दुनिया के सदस्य देशों ने अपने रिजर्व से 400 मिलियन बैरल तेल निकालने का फैसला किया है, जिसमें अमेरिका 172 मिलियन बैरल तेल निकालेगा।

एनर्जी संकट से जुड़ी मुख्य जानकारी

विवरण जानकारी
युद्ध शुरू होने की तारीख 28 फरवरी 2026
Strait of Hormuz बंद होने की तारीख 4 मार्च 2026
दैनिक तेल उत्पादन में कमी 13 मिलियन बैरल
रिज़र्व से निकाला गया तेल 400 मिलियन बैरल
प्लांट ठीक होने में लगने वाला समय 2 साल से अधिक
यूरोप में जेट फ्यूल की उपलब्धता लगभग 6 हफ्ते