ईरान युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा गया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने बताया कि इस जंग में 80 से ज़्यादा तेल और गैस के ठिकाने तबाह हो चुके हैं। इसमें रिफाइनरी और ट्रांसपोर्ट स्टेशन भी शामिल हैं, जिससे ग्लोबल मार्केट में भारी हलचल मची है।

IEA ने क्या जानकारी दी है?

IEA के चीफ फातिह बिरोल ने सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को यह खबर साझा की। उन्होंने कहा कि यह इतिहास का सबसे बड़ा एनर्जी संकट है। एजेंसी अब तेल के रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है ताकि सप्लाई बनी रहे।

दुनिया और आम लोगों पर क्या होगा असर?

IEA, IMF और वर्ल्ड बैंक ने एक साथ बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का सबसे बुरा असर उन देशों पर पड़ेगा जो बाहर से तेल खरीदते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला व्यापार अभी तक सामान्य नहीं हो पाया है।

सऊदी अरब और नुकसान का हिसाब

सऊदी अरब ने बताया कि ईरानी हमलों की वजह से उसकी उत्पादन क्षमता 6 लाख बैरल प्रतिदिन कम हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन खराब हुए प्लांटों को ठीक करने में बहुत भारी खर्चा आएगा।

विवरण जानकारी
कुल तबाह ठिकाने 80 से ज़्यादा
सऊदी उत्पादन में कमी 6 लाख बैरल प्रतिदिन
अनुमानित मरम्मत खर्च 25 अरब डॉलर
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.