ईरान में चल रहे युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ गए हैं। इस महंगे ईंधन ने लोगों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) की तरफ मोड़ दिया है। इस संकट का सबसे बड़ा फायदा चीन को मिल रहा है, क्योंकि वहां की कंपनियां दुनिया में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें बनाती हैं।

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तेल संकट और आम आदमी पर असर

International Energy Agency (IEA) के डायरेक्टर फातिह बिरोल ने बताया कि मिडिल ईस्ट के इस युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट आई है। इस असर से दुनिया भर के देशों में ईंधन महंगा हो गया है और कई देशों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

विवरण जानकारी/डाटा
तेल की कीमत $100 प्रति बैरल तक पहुंची
यूरोप में EV बिक्री मार्च में 51% की बढ़ोत्तरी
यूरोप में नई EV रजिस्ट्रेशन 2,24,000 गाड़ियां
सालाना ईंधन खर्च (UK) £320 से ज्यादा की बढ़ोत्तरी
अमेरिका में महंगाई (PCE) 0.6 प्रतिशत पॉइंट बढ़ने का अनुमान
फिलीपींस की स्थिति राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित

चीन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाज़ार

चीन के क्लाइमेट एनवॉय लियू झेनमिन ने कहा कि इस युद्ध से चीन में तेल या गैस का संकट तो नहीं आएगा, लेकिन सरकार अब एनर्जी ट्रांज़िशन की रफ़्तार बढ़ाएगी। चीन की कंपनियां जैसे BYD और Xpeng अब अपनी गाड़ियों का निर्यात और बढ़ा रही हैं।

  • चीन दुनिया में EV उत्पादन का लीडर है।
  • बाज़ार में बढ़ती मांग से चीनी ऑटोमेकर्स की सेल बढ़ने की उम्मीद है।
  • यूरोप में पेट्रोल-डीज़ल महंगा होने से वहां इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ी है।