ईरान में चल रहे युद्ध को लेकर जर्मनी ने अपनी बड़ी चिंता जाहिर की है। जर्मनी के बड़े अधिकारियों का मानना है कि इस युद्ध के नतीजे यूरोप के लिए वैसे ही खतरनाक हो सकते हैं जैसे कोरोना महामारी के समय देखे गए थे। जर्मन राष्ट्रपति Frank-Walter Steinmeier ने इस संघर्ष को एक बड़ी राजनीतिक गलती और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। जर्मनी के मुताबिक, इस युद्ध से न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया की शांति और व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा।

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इस युद्ध का आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

जर्मनी और अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध के कारण पूरी दुनिया की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इससे ऊर्जा, धातु और खाद के सेक्टर पर भारी दबाव बढ़ गया है। यूरोप के देशों के लिए यह झटका रूस-यूक्रेन युद्ध से भी बड़ा साबित हो सकता है क्योंकि उनकी निर्भरता बाहरी ऊर्जा स्रोतों पर बहुत ज्यादा है।

  • ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट आने से सामानों की कमी हो सकती है।
  • ईंधन और बिजली की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की संभावना है।
  • खाद और मेटल की कमी से खेती और निर्माण कार्यों पर असर पड़ेगा।
  • यूरोप में महंगाई बढ़ने से आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ेगा।

जर्मनी और अमेरिका के रिश्तों में क्यों आ रही है दरार?

चांसलर Friedrich Merz और राष्ट्रपति Steinmeier ने स्पष्ट किया है कि इस युद्ध को लेकर यूरोप और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। उनका कहना है कि वाशिंगटन ने इस युद्ध के बारे में अपने यूरोपीय भागीदारों से कोई सलाह नहीं ली है। जर्मनी का मानना है कि इस युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका के पास फिलहाल कोई साझा योजना नहीं है।

अधिकारी का नाम मुख्य बयान
Frank-Walter Steinmeier यह युद्ध एक विनाशकारी गलती और राजनीतिक नुकसान है।
Friedrich Merz युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के पास कोई साझा प्लान नहीं है।
Vladimir Putin युद्ध के नतीजे कोरोना महामारी जैसे भयानक हो सकते हैं।

जर्मन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और यूरोप के बीच जो दरार पैदा हुई है, उसे भरना अब मुश्किल होगा। जर्मनी अब कूटनीति के जरिए इस युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने की मांग कर रहा है ताकि वैश्विक आर्थिक संकट को रोका जा सके।