Iran War: ईरान युद्ध से भारत में बढ़ी मुसीबत, मोरबी के सिरेमिक उद्योग में छंटनी, लोग लौटे अपने गांव

ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच छिड़े युद्ध ने भारत के गुजरात स्थित मोरबी के सिरेमिक उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है. गैस की कमी और बढ़ती कीमतों की वजह से यहाँ कई फैक्ट्रियां बंद हुईं, जिससे हज़ारों लोगों की नौकरी चली गई. अब हालात यह हैं कि कई मज़दूर काम छोड़कर अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं.

ईरान युद्ध से भारत के उद्योगों पर क्या असर पड़ा?

ईरान युद्ध की वजह से दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें बढ़ गईं, जिसका सीधा असर भारत की उत्पादन लागत पर पड़ा. मोरबी के सिरेमिक हब में गैस की सप्लाई सीमित कर दी गई, जिससे उत्पादन करना मुश्किल हो गया. US Treasury ने ईरानी तेल पर कड़े प्रतिबंध लगाए और एक समय सीमा तय की, जिससे भारत के लिए ईंधन का इंतजाम करना एक बड़ी चुनौती बन गया.

नौकरियों और मज़दूरों की क्या हालत है?

सिरेमिक इंडस्ट्री, जिसकी कीमत करीब 53,000 करोड़ रुपये है, इस समय भारी मंदी का सामना कर रही है. लेबर कॉन्ट्रैक्टर राममणि द्विवेदी के मुताबिक, जब उत्पादन गिरता है तो मज़दूरों और सपोर्ट स्टाफ की जरूरत कम हो जाती है, जिससे तुरंत छंटनी शुरू हो गई. कई शहरों में मज़दूर अब काम न मिलने के कारण वापस अपने गांवों की तरफ जा रहे हैं.

सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए क्या किया?

भारत सरकार ने ऊर्जा संकट को कम करने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए. सरकार ने LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि घरेलू रसोई गैस की किल्लत न हो. साथ ही, कुछ टैक्स और ड्यूटी में कटौती की गई ताकि कंपनियों को राहत मिल सके. संकट से जुड़ी मुख्य जानकारियाँ नीचे दी गई हैं:

कदम/नियम विवरण
गैस सप्लाई मोरबी की इकाइयों के लिए गैस सप्लाई औसत खपत के 80% तक सीमित की गई
Polymer Duties सरकार ने 10-15% की पॉलीमर ड्यूटी को खत्म कर दिया
LPG उत्पादन रिफाइनरियों को LPG उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दिया गया
US प्रतिबंध अमेरिकी ट्रेजरी ने 20 मार्च 2026 के बाद के ईरानी तेल पर प्रतिबंध लगाए
इकाइयों की स्थिति 15 अप्रैल 2026 को मोरबी की 142 सिरेमिक इकाइयां दोबारा शुरू हुईं
समुद्री रास्ता 19 अप्रैल 2026 को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद किया