यूरोपीय संघ (EU) के ऊर्जा आयुक्त डैन जोर्गेंसन (Dan Jørgensen) ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद भी तेल और गैस की कीमतें जल्द ही सामान्य स्तर पर नहीं लौटेंगी। वैश्विक बाजार में बढ़ते दबाव के कारण गैस की कीमतों में लगभग 70% और तेल की कीमतों में 60% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। यूरोपीय ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के बाद यह साफ कर दिया गया है कि फिलहाल आम जनता को महंगे ईंधन से राहत मिलना मुश्किल है।

तेल और गैस की कीमतों में कितनी हुई बढ़ोतरी?

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। यूरोपीय संघ के ऊर्जा आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि भले ही शांति बहाल हो जाए, लेकिन बाजार पर इसका असर लंबे समय तक रहेगा।

ईंधन का प्रकार कीमतों में वृद्धि
गैस (Gas) 70% लगभग
तेल (Oil) 60% लगभग
अतिरिक्त आयात बिल 14 अरब यूरो

इस संकट की वजह से यूरोपीय देशों का जीवाश्म ईंधन आयात बिल 14 अरब यूरो तक बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव की वजह से कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई पर सीधा दबाव पड़ा है, जिससे पूरी दुनिया में बिजली और ट्रांसपोर्ट महंगा हो रहा है।

आम जनता और प्रवासियों पर क्या होगा असर?

ईंधन की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। यूरोपीय संघ अब घरों और व्यापारों की मदद के लिए एक खास उपाय तैयार कर रहा है। इसमें बिजली पर टैक्स कटौती जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

  • डीजल और जेट फ्यूल: बाजार में डीजल और हवाई जहाज के ईंधन (Jet Fuel) की भारी कमी महसूस की जा रही है, जिससे यात्रा और माल ढुलाई महंगी हो सकती है।
  • ऊर्जा संरक्षण: यूरोपीय देशों ने अपने नागरिकों से ऊर्जा बचाने की अपील की है, खासकर ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में ताकि संकट को कम किया जा सके।
  • बिजली के दाम: गैस की कमी और बढ़ी हुई कीमतों की वजह से बिजली बनाना महंगा हो गया है, जिसका असर घरेलू बिलों पर पड़ेगा।
  • रूस पर निर्भरता: यूरोपीय संघ ने साफ किया है कि वे रूस से गैस नहीं खरीदेंगे ताकि युद्ध के लिए फंड न मिले, जिससे बाजार में सप्लाई और सीमित हो गई है।

यूरोपीय आयोग अब बिजली पर टैक्स कटौती और गैस की कीमतों को बिजली की कीमतों से अलग करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। जो लोग खाड़ी क्षेत्र से यात्रा करते हैं या वहां से जुड़े व्यापार में हैं, उन्हें आगामी महीनों में और अधिक सावधानी बरतनी होगी क्योंकि सप्लाई चेन में दिक्कतें जारी रह सकती हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.