ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब दुनिया के दूर-दराज इलाकों में दिखने लगा है. फिलीपींस के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में रहने वाले ‘सामा बडझाओ’ समुदाय के लोग इस वक्त भारी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं. समुद्र पर निर्भर रहने वाले इन मछुआरों के लिए अब गुजारा करना मुश्किल होता जा रहा है.

सामा बडझाओ समुदाय को क्या परेशानी हो रही है?

Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, सामा बडझाओ जिन्हें ‘सी नोमैड्स’ यानी समुद्र के घुमंतू भी कहा जाता है, पूरी तरह मछली पकड़ने पर निर्भर हैं. ईरान युद्ध की वजह से दुनिया भर में चीजों के दाम बढ़ गए हैं, जिससे इस गरीब समुदाय की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है. समुदाय के एक मछुआरे ने बताया कि महंगाई के कारण उसके परिवार को अब बुनियादी जरूरतों के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है.

दुनिया भर में इस युद्ध का क्या प्रभाव पड़ा है?

  • दवाइयों के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है और कुछ देशों में दर्द निवारक दवाइयों की कीमत चार गुना तक बढ़ गई है.
  • संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि इस युद्ध की वजह से लगभग 3 करोड़ लोग फिर से गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं.
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से ईंधन और खाद की सप्लाई में दिक्कत आई है, जिससे फसलों की पैदावार पर असर पड़ा है.
  • अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चल रही बातचीत भी अब रुक गई है, जिससे तनाव और बढ़ गया है.

फिलीपींस सरकार की मदद और मौजूदा स्थिति

फिलीपींस की बंगसामोरो सरकार (BARMM) ने इस समुदाय के लिए ‘लायग बडझाओ प्रोग्राम’ शुरू किया था. इस प्रोग्राम के तहत जनवरी 2026 तक सुलू के 30 बडझाओ निवासियों को ट्रेनिंग दी गई और 15,000 फिलीपीन पेसो की आर्थिक मदद दी गई ताकि वे अपना काम टिकाऊ बना सकें. हालांकि, वर्तमान में ईरान युद्ध से बढ़ी महंगाई के खिलाफ सरकार की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.