ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच चल रहे युद्ध ने अब हवाई यात्रा पर असर डालना शुरू कर दिया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के मुताबिक जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे एयरलाइंस पर दबाव बढ़ गया है। इस वजह से आने वाले समय में हवाई टिकट महंगे हो सकते हैं और गर्मियों की छुट्टियों के दौरान उड़ानों में कटौती हो सकती है।

जेट फ्यूल की कीमतें क्यों बढ़ीं और क्या है मुख्य कारण

अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच फरवरी के अंत में शुरू हुई शत्रुता के बाद से जेट फ्यूल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी जेट फ्यूल की कीमतों में 103% तक की वृद्धि हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है, जहाँ से दुनिया के समुद्री तेल का लगभग एक-चौथाई हिस्सा गुजरता है। इसके अलावा ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कई अरब देशों में तेल और गैस के बुनियादी ढांचे पर बमबारी की है, जिससे ऊर्जा बाजार में बड़ी बाधा आई है।

IATA के महानिदेशक विली वॉल्श ने चेतावनी दी है कि सप्लाई को सामान्य होने में अभी कई महीने लग सकते हैं। रिफाइनरियां फिलहाल जेट फ्यूल के बजाय डीजल और गैसोलिन बनाने को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे हवाई जहाजों के ईंधन की कमी और बढ़ सकती है।

दुनियाभर की एयरलाइंस और यात्रियों पर पड़ने वाला असर

ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अलग-अलग देशों की एयरलाइंस पर दिखना शुरू हो गया है। यूरोप की एयरलाइंस सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं क्योंकि वे अपना एक-तिहाई ईंधन मध्य पूर्व से मंगवाती हैं। वहीं भारत में भी एयरलाइंस ने सरकार से मदद मांगी है ताकि यात्रियों पर बोझ कम हो सके।

संस्था/देश असर और मुख्य अपडेट
अमेरिकी जेट फ्यूल कीमतों में लगभग 103% की बढ़त दर्ज की गई
लुफ्थांसा (जर्मनी) अक्टूबर तक 20,000 उड़ानें रद्द करने का फैसला किया
भारतीय एयरलाइंस घरेलू उड़ानों पर 11% उत्पाद शुल्क हटाने की मांग की
अमेरिकी एयरलाइंस चेक-इन बैग की फीस और टिकट किराए में बढ़ोतरी की
यूरोपीय संघ ईंधन की कमी होने पर स्टॉक जारी करने की तैयारी की
यूरोप और एशिया मई के अंत तक उड़ानों के रद्द होने की संभावना जताई गई

आने वाले समय में यात्रा करने वालों के लिए चेतावनी

विली वॉल्श ने बताया कि जेट फ्यूल की कमी का सबसे पहला असर एशिया में दिखेगा, जिसके बाद यूरोप, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की बारी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि गर्मियों की छुट्टियों के समय उड़ानों के शेड्यूल में कटौती करनी पड़ सकती है। स्वीडन की ऊर्जा मंत्री एब्बा बुश ने भी यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाते समय लचीलापन रखें क्योंकि भविष्य में उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, मांग अभी भी मजबूत है, इसलिए पूरी तरह से हवाई यात्रा बंद होने की उम्मीद नहीं है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या ईरान युद्ध की वजह से हवाई टिकट महंगे होंगे?

हाँ, जेट फ्यूल की कीमतों में 84% से 103% तक की बढ़त हुई है, जिसकी वजह से कई एयरलाइंस ने किराए और बैग शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है।

किन क्षेत्रों में फ्लाइट्स रद्द होने का सबसे ज्यादा खतरा है?

IATA के अनुसार सबसे पहले एशिया और उसके बाद यूरोप में उड़ानें रद्द हो सकती हैं। जर्मनी की लुफ्थांसा ने पहले ही 20,000 उड़ानें रद्द करने की बात कही है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.