ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध ने अब पूरी दुनिया के हवाई सफर को मुश्किल में डाल दिया है। जेट फ्यूल यानी हवाई जहाजों के ईंधन की भारी कमी हो गई है, जिससे कई देशों में फ्लाइट्स रद्द होने का खतरा बढ़ गया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने चेतावनी दी है कि इसका सबसे ज्यादा असर पहले एशिया और फिर यूरोप, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में दिखेगा।

किन एयरलाइंस पर पड़ा असर और क्या है स्थिति?

ईंधन की कमी की वजह से दुनिया की कई बड़ी एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें कम कर दी हैं या उन्हें रद्द कर दिया है। कुछ एयरलाइंस ने तो यात्रियों पर लगने वाले फ्यूल सरचार्ज को भी बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो विदेश यात्रा कर रहे हैं या करने वाले हैं।

एयरलाइन/संस्था की गई कार्रवाई / असर
Lufthansa 20,000 शॉर्ट-हॉल फ्लाइट्स कैंसिल कीं
SAS (स्कैंडिनेवियन एयरलाइन) अप्रैल में 1,000 फ्लाइट्स रद्द कीं
KLM 80 रिटर्न फ्लाइट्स में कटौती की
Aer Lingus समर शेड्यूल में 2% की कमी की
Ryanair 5-10% फ्लाइट्स कैंसिल होने की चेतावनी दी
Japan Airlines और ANA 1 मई से अंतरराष्ट्रीय फ्यूल सरचार्ज दोगुना किया

ईंधन की कमी क्यों हुई और एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

इस संकट की मुख्य वजह ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करना है, जिससे तेल की सप्लाई रुक गई है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा सुरक्षा खतरा बताया है। उनके अनुसार, यूरोप के पास अब केवल छह हफ्ते का जेट फ्यूल बचा है।

IATA के डायरेक्टर जनरल विली वॉल्श ने बताया कि मिडिल ईस्ट से यूरोप को होने वाली ईंधन की सप्लाई लगभग शून्य हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुल भी जाता है, तो सप्लाई को ठीक होने में कई महीने लगेंगे क्योंकि रिफाइनिंग क्षमता को भारी नुकसान पहुँचा है।

एशिया और बाकी दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

विली वॉल्श के मुताबिक, ईंधन की इस कमी का सबसे पहला असर एशिया में देखा गया है और अब यह यूरोप, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक फैलेगा। चीन ने जेट फ्यूल के निर्यात पर पाबंदी लगा दी है और दक्षिण कोरिया ने कच्चे तेल की कमी के कारण उत्पादन घटा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वियतनाम, म्यांमार और पाकिस्तान जैसे देश इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। वहीं, यूरोपीय संघ के ऊर्जा आयुक्त डैन जोर्गेंसेन ने सुझाव दिया है कि संकट से बचने के लिए यूरोपीय देशों को आपस में ईंधन साझा करना पड़ सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

हवाई जहाजों के ईंधन की कमी का मुख्य कारण क्या है?

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जिससे मिडिल ईस्ट से होने वाली तेल की सप्लाई पूरी तरह बाधित हो गई है।

किन क्षेत्रों में फ्लाइट्स रद्द होने का सबसे ज्यादा खतरा है?

IATA के अनुसार, इसका असर सबसे पहले एशिया में शुरू हुआ है, जिसके बाद यूरोप, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में बड़े पैमाने पर फ्लाइट्स कैंसिल हो सकती हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com