Iran War: अमेरिका और इसराइल के युद्ध से 3 करोड़ लोग हो सकते हैं गरीब, खाद और ईंधन की कमी मचाएगी तबाही
अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमले अब पूरी दुनिया के लिए बड़ी मुसीबत बन रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के विकास प्रमुख अलेक्जेंडर डी क्रू ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ महीनों में 3 करोड़ से ज़्यादा लोग गरीबी की चपेट में आ सकते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ईंधन और खाद की सप्लाई में आई भारी रुकावट है।
खाद और ईंधन की कमी से कैसे बढ़ेगी गरीबी?
अलेक्जेंडर डी क्रू ने बताया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों का रास्ता रुकने से खाद की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। दुनिया की करीब एक तिहाई खाद इसी समुद्री रास्ते से भेजी जाती है। इस रुकावट की वजह से खेती की पैदावार कम हो गई है और 2026 के अंत तक दुनिया के कई हिस्सों में खाने-पीने की चीज़ों की भारी किल्लत हो सकती है।
क्या इस संकट को रोका जा सकता है?
UN अधिकारी के मुताबिक, अगर समय रहते 6 अरब डॉलर की सही जगह निवेश और मदद दी जाए, तो दुनिया भर के करीब 3.2 करोड़ लोगों को गरीबी में जाने से बचाया जा सकता है। यह पैसा ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और खाद के व्यापार को संभालने के लिए ज़रूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर युद्ध अभी तुरंत रुक भी जाता है, तब भी इसका असर लंबे समय तक रहेगा और लाखों लोग आर्थिक तंगी झेलेंगे।
किन देशों पर होगा सबसे ज़्यादा असर?
इस युद्ध की वजह से सबसे ज़्यादा खतरा अफ्रीका और एशिया के देशों में रहने वाले लोगों को है। इन इलाकों में पहले से ही महंगाई और खाने की कमी की समस्या है। ईंधन और खाद के दाम बढ़ने से यहाँ के आम लोगों और किसानों की कमर टूट जाएगी, जिससे वे गरीबी के दलदल में धंस सकते हैं।