अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट्स के बीच ईरान युद्ध को लेकर तकरार बढ़ गई है। डेमोक्रेट्स अब सीनेट में वोटिंग के जरिए इस युद्ध को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान में शांति वार्ता की उम्मीद जागी है। इस पूरे विवाद का असर अब वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों और सुरक्षा पर पड़ रहा है।

डेमोक्रेट्स क्यों कर रहे हैं युद्ध का विरोध?

सीनेट में डेमोक्रेटिक लीडर चक शुमर ने इस सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फेल’ का नाम दिया है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों से अस्थिरता बढ़ रही है और ईंधन के दाम महंगे हो रहे हैं। कई डेमोक्रेटिक नेताओं ने ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ पेश किया है ताकि राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित किया जा सके। उनका दावा है कि युद्ध शुरू करने का असली अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास होना चाहिए।

क्या ईरान और अमेरिका के बीच शांति होगी?

राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों में पाकिस्तान में शांति वार्ता फिर से शुरू हो सकती है। हालांकि, ट्रंप का कहना है कि वे ईरान पर दबाव बनाए रखेंगे ताकि वह परमाणु हथियार न बना सके। इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी शुरू कर दी है। अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये हमले संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का उल्लंघन हो सकते हैं और इन्हें युद्ध अपराध माना जा सकता है।

ईरान युद्ध से जुड़ी मुख्य समयसीमा और घटनाक्रम

तारीख घटना
28 फरवरी 2026 अमेरिका और इसराइल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत हमले शुरू किए
7 अप्रैल 2026 अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ
13 अप्रैल 2026 ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी शुरू हुई
14 अप्रैल 2026 राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान में शांति वार्ता की बात कही
15 अप्रैल 2026 सीनेट में वॉर पावर्स रेजोल्यूशन पर वोटिंग होने की उम्मीद है
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.