ईरान और इसराइल के बीच जारी तनाव ने अब खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि अगर बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट के पास हमले नहीं रुके, तो इसका रेडियोएक्टिव असर GCC देशों की राजधानियों तक पहुँच सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हालात पहले से ही काफी नाजुक बने हुए हैं और परमाणु सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में डर का माहौल है।

न्यूक्लियर प्लांट पर हमले में अब तक क्या नुकसान हुआ है?

4 अप्रैल 2026 को बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास मिसाइल हमले के बाद एक बड़ा धमाका हुआ। इस हमले में एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई और संयंत्र की एक सहायक इमारत को काफी नुकसान पहुँचा है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि संयंत्र का मुख्य हिस्सा सुरक्षित है और बिजली उत्पादन पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ा है। युद्ध शुरू होने के बाद से यह चौथी बार है जब इस संवेदनशील स्थल को निशाना बनाने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही खुजेस्तान प्रांत में पेट्रोकेमिकल सुविधाओं पर भी हमले हुए हैं जहाँ पाँच लोग घायल हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना का क्या असर दिख रहा है?

  • IAEA ने इन हमलों पर गहरी चिंता जताई है और कहा है कि परमाणु सुविधाओं के पास सैन्य कार्रवाई नियमों का उल्लंघन है।
  • रूस की सरकारी परमाणु कंपनी Rosatom ने एहतियात के तौर पर बुशेहर से अपने कर्मचारियों को निकालना शुरू कर दिया है।
  • ईरान ने सीधे तौर पर इसराइल और अमेरिका पर प्लांट को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
  • खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी रेडियोधर्मी रिसाव का सीधा असर उनके शहरों और वहां रहने वाले लोगों पर पड़ेगा।
  • ईरान के अनुसार पेट्रोकेमिकल साइट्स पर हमले दुश्मनों के असली इरादों को साफ कर रहे हैं।

यह स्थिति खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और खास तौर पर भारतीय समुदाय के लिए भी चिंता का विषय है क्योंकि तनाव बढ़ने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रही हैं ताकि किसी बड़ी परमाणु दुर्घटना से बचा जा सके।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.