ईरान के सरकारी मीडिया ने खाड़ी देशों और इज़राइल को बिजली आपूर्ति ठप करने की कड़ी चेतावनी दी है। जारी किए गए नए नक्शों में सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत के पावर प्लांट्स को संभावित निशाने के तौर पर दिखाया गया है। ईरानी मीडिया ने इसे ‘Say goodbye to electricity’ शीर्षक के साथ प्रकाशित किया है। यह चेतावनी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ऊर्जा सुरक्षा के खतरों को दर्शाती है और इसे अमेरिकी अल्टीमेटम के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

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किन पावर प्लांट्स और देशों को दी गई है चेतावनी?

ईरान के सरकारी मीडिया आउटलेट्स मेहर न्यूज़ एजेंसी और मिज़ान ऑनलाइन ने 23 मार्च 2026 को कुछ नक्शे जारी किए हैं। इन नक्शों में खाड़ी क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों को चिन्हित किया गया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने साफ़ किया है कि अगर उनके ऊर्जा केंद्रों पर हमला हुआ तो वे भी जवाबी कार्रवाई करेंगे।

  • सऊदी अरब और यूएई के प्रमुख पावर प्लांट्स को लिस्ट में शामिल किया गया है।
  • कतर और कुवैत के ऊर्जा केंद्र भी ईरान के संभावित निशाने पर हैं।
  • इज़राइल के दो बड़े पावर प्लांट ओरोट राबिन और रुटेनबर्ग को भी नक्शों में दिखाया गया है।
  • क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों के पास वाले ऊर्जा केंद्रों को भी खतरा है।

क्या है इस चेतावनी के पीछे का मुख्य कारण?

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालबाफ ने बयान दिया है कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो क्षेत्रीय ऊर्जा और तेल बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया जाएगा। यह तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए 48 घंटे का समय दिया था। ईरान ने साफ़ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है। बिजली और ऊर्जा केंद्रों पर किसी भी तरह के हमले का सीधा असर आम जनजीवन और वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। ईरान ने अपनी सैन्य तैयारी और निशाने पहले ही सार्वजनिक कर दिए हैं जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल है।