ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों में चिंता की लहर है। ईरान के सरकारी मीडिया ने हाल ही में एक इन्फोग्राफिक्स जारी किया है जिसका शीर्षक है बिजली को कहो अलविदा। इसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और कुवैत के प्रमुख पावर प्लांट्स को संभावित निशाने के रूप में दिखाया गया है। यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद आई है।

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ईरान ने किन ठिकानों को दी है हमले की चेतावनी?

ईरान के सरकारी मीडिया और IRGC ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई हमला होता है, तो वे क्षेत्र के अन्य देशों के ऊर्जा संसाधनों को निशाना बनाएंगे। उन ठिकानों की सूची नीचे दी गई है जिन्हें ईरान ने अपने नक्शे में शामिल किया है:

  • सऊदी अरब, कतर और कुवैत: इन देशों के मुख्य पावर और डिसेलिनेशन (पानी साफ करने वाले) प्लांट।
  • संयुक्त अरब अमीरात: इसमें बराक (Barakah) परमाणु ऊर्जा केंद्र को भी संभावित टारगेट बताया गया है।
  • इजरायल: ओरोट राबिन और रुटेनबर्ग जैसे दो बड़े पावर प्लांट नक्शे में शामिल हैं।
  • Strait of Hormuz: ईरान ने इसे तब तक बंद रखने की घोषणा की है जब तक उसके नष्ट बिजली घरों का निर्माण दोबारा नहीं हो जाता।

इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई और अब आगे क्या होगा?

यह पूरा मामला 21 मार्च 2026 को तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का समय दिया। ट्रंप ने कहा था कि ऐसा न होने पर ईरान के सबसे बड़े बिजली घरों पर हमले किए जाएंगे। इसके जवाब में ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर हमला हुआ तो पूरे क्षेत्र का बुनियादी ढांचा नष्ट हो जाएगा।

खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों, विशेषकर भारतीयों के लिए यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है क्योंकि यह विवाद सीधे तौर पर बिजली और पानी की सप्लाई से जुड़ा है। IRGC ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी कंपनियों को भी चेतावनी के दायरे में रखा है। फिलहाल ईरान ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है कि वह किसी भी हमले का जवाब बड़े स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र को ठप करके देगा।