ईरान और एलोन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के बीच विवाद अब बहुत गंभीर हो गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह उन सभी जगहों पर हमला कर सकता है जहाँ स्टारलिंक के स्टेशन लगे हैं। इस लिस्ट में UAE, कतर और ओमान जैसे खाड़ी देश भी शामिल हैं, जिससे यहाँ रहने वाले प्रवासियों और आम लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है।

सैन्य टारगेट बनाने की तैयारी

ईरान की सरकारी एजेंसी Fars News Agency ने ऐलान किया है कि वह एलोन मस्क की सभी कंपनियों को सैन्य टारगेट मान रहा है। इसमें SpaceX का स्टारलिंक इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X भी शामिल हैं। ईरान का आरोप है कि इन सेवाओं का इस्तेमाल अमेरिका और इसराइल द्वारा सैन्य ऑपरेशनों, हवाई ड्रोन हमलों और समुद्री जहाजों पर हमला करने के लिए किया गया है।

किन देशों के स्टेशनों पर खतरा

ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि वह उन देशों के स्टारलिंक ग्राउंड स्टेशनों को निशाना बना सकता है जहाँ उसकी अनुमति नहीं है। इन देशों में शामिल हैं:

  • UAE (संयुक्त अरब अमीरात)
  • कतर
  • ओमान
  • जॉर्डन
  • इसराइल

ईरान का मानना है कि उसकी जमीन पर बिना इजाजत इंटरनेट सेवाएं देना उसके कानूनों का उल्लंघन है।

भारत ने रोका स्टारलिंक का रास्ता

इस पूरे विवाद का असर अब भारत में भी दिख रहा है। भारत के गृह मंत्रालय ने सुरक्षा और नियमों को लेकर चिंता जताई है। इसी वजह से 9 जून 2026 को भारत सरकार ने स्टारलिंक के कमर्शियल लॉन्च की मंजूरी पर रोक लगा दी है। सरकार को डर है कि ऐसी अनधिकृत सेवाएं भौगोलिक तनाव के समय देश के कंट्रोल को कमजोर कर सकती हैं।

ईरान के सख्त कानून और ITU का फैसला

ईरान ने अपने देश के अंदर स्टारलिंक चलाने वालों के लिए बहुत कठोर सजा तय की है। नए कानूनों के मुताबिक:

  • निजी इस्तेमाल करने वालों को 6 महीने से 2 साल तक की जेल होगी।
  • जासूसी या सरकार के खिलाफ काम करने पर मौत की सजा दी जा सकती है।

वहीं इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने भी ईरान के हक में फैसला सुनाया है। ITU ने कहा है कि स्टारलिंक को ईरान में काम करने से पहले वहां की सरकार से मंजूरी लेनी होगी और बिना अनुमति वाले टर्मिनल्स को बंद करना होगा।

एलोन मस्क ने क्या कहा

एलोन मस्क ने उन रिपोर्टों को नकारा है जिनमें स्टारलिंक को अमेरिकी खुफिया नेटवर्क का मुख्य हिस्सा बताया गया था। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि कुछ ड्रोन बनाने वाली कंपनियों ने स्टारलिंक का गलत इस्तेमाल किया है। मस्क के मुताबिक यह कंपनी के नियमों के खिलाफ है और इसका जिम्मेदार ड्रोन बनाने वाली कंपनी है, न कि पेंटागन।