पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। ईरान ने बहरीन को सैन्य कार्रवाई की गंभीर चेतावनी दी है, जिससे इलाके में डर का माहौल है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अमेरिका और ईरान ने फिलहाल एक-दूसरे पर हमले रोकने का फैसला किया है ताकि बातचीत के जरिए रास्ता निकाला जा सके।

Doha में होगी बड़ी बैठक

अमेरिका और ईरान के बीच 28 जून 2026 से सभी सैन्य हमलों को रोकने का समझौता हुआ है। अब 30 जून को कतर के Doha में दोनों देशों के बीच अहम बातचीत होगी। इस बैठक का मुख्य मकसद Strait of Hormuz के समुद्री विवाद को सुलझाना है। अमेरिका की तरफ से Nick Stewart इस तकनीकी टीम का नेतृत्व करेंगे। पहले यह बातचीत स्विट्जरलैंड में होनी थी, लेकिन हालात देखते हुए इसे Doha शिफ्ट किया गया।

बढ़ता तनाव और ड्रोन हमले

पिछले कुछ दिनों में हालात काफी खराब रहे। 27 और 28 जून 2026 को ईरान की Revolutionary Guard ने कुवैत और Bahrain में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। यह हमला 26 जून को अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों का बदला था। Bahrain के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। गौरतलब है कि बहरीन में अमेरिकी नौसेना की Fifth Fleet मौजूद है।

Strait of Hormuz पर विवाद

विवाद की मुख्य वजह Strait of Hormuz का नियंत्रण है। ईरान के अधिकारियों ने साफ़ कहा है कि इस समुद्री रास्ते का मैनेजमेंट केवल ईरान ही करेगा। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने चेतावनी दी कि कोई भी नया इंतजाम तनाव को और बढ़ाएगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी नौसेना की देखरेख में ओमान के पास एक नया रूट शुरू किया गया है, जिसे ईरान अपनी ताकत को चुनौती देना मान रहा है।

बातचीत में रुकावट और ट्रंप की चेतावनी

ईरान ने रविवार को होने वाली तकनीकी बातचीत में हिस्सा नहीं लिया। उनका कहना है कि MOU की शर्तों के मुताबिक उनके फ्रीज किए गए फंड्स अभी तक उन्हें नहीं मिले हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सख्त लहजे में कहा है कि अगर अमेरिका को दोबारा सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी, तो ईरान का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।