अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी देशों में चिंता बढ़ा दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने 12 जुलाई 2026 को हुए अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है। ईरान का कहना है कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है और इससे क्षेत्र की शांति खतरे में पड़ गई है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी देश अपनी जमीन या सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए करने देगा, उसे भी अब एक वैध लक्ष्य माना जाएगा।
हमलों का कारण और ईरान का पक्ष
CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी सेना ने 12 जुलाई 2026 को ईरान पर हमले किए। अमेरिका का दावा है कि ये हमले होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए गए। इसके जवाब में ईरान ने कहा है कि अमेरिका ने संघर्ष विराम समझौते को तोड़ते हुए उसके व्यापारिक जहाजों, कार्गो और विमानन सुविधाओं को निशाना बनाया है।
क्षेत्रीय देशों पर असर
इस तनाव का असर पूरे इलाके पर दिख रहा है। ओमान ने ईरान के ड्रोन हमलों के विरोध में वहां के राजदूत को तलब किया है। वहीं, ईरान के अधिकारियों ने दावा किया है कि अमेरिकी गतिविधियों के कारण होरमुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने जोर देकर कहा कि खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर उनके द्वारा किए गए हमले आत्मरक्षा का हिस्सा थे। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने और अमेरिका को जवाबदेह ठहराने की मांग की है।
