ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है. ईरान की National Security Council ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को कड़ी चेतावनी दी है कि वे ईरानी लोगों के बारे में सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल करें. काउंसिल ने साफ कहा कि अगर ट्रंप ने अपना लहजा नहीं बदला, तो ईरान उन्हें दूसरी भाषा में जवाब देगा.
ईरान की कड़ी चेतावनी
6 जुलाई 2026 को ईरान की Supreme National Security Council के सचिव Mohammad Bagher Zolghadr ने यह चेतावनी जारी की. उन्होंने Donald Trump की धमकियों को पूरी तरह से गलत बताया और कहा कि ईरानी लोग धमकियों की भाषा नहीं समझते. उन्होंने मांग की कि अमेरिका ईरान के लोगों के साथ सम्मान से बात करे.
अन्य ईरानी नेताओं ने भी दी धमकी
इस विवाद के बीच ईरान के अन्य बड़े नेताओं ने भी अमेरिका के खिलाफ कड़े बयान दिए हैं:
- Gholamhossein Mohseni Ejei: ईरान के चीफ जस्टिस ने पूर्व सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की हत्या के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा.
- Kazem Gharibabadi: डिप्टी विदेश मंत्री ने Strait of Hormuz में सैन्य गतिविधियों के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि यह इलाका बाहरी ताकतों के सैन्य प्रदर्शन के लिए नहीं है.
- Mohammad Bagher Ghalibaf: मुख्य वार्ताकार ने साफ किया कि ईरान अमेरिका के साथ शांति में नहीं है और वह इजराइल को मान्यता नहीं देगा.
डोनाल्ड ट्रंप का पलटवार
इन चेतावनियों के जवाब में राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अमेरिका या तो ईरान के साथ समझौता करेगा या फिर इस काम को पूरी तरह खत्म कर देगा. उन्होंने धमकी दी कि अमेरिका महज एक घंटे में ईरान के पुल गिरा सकता है और एक दोपहर में उनके बिजली संयंत्रों और ऊर्जा आपूर्ति को ठप कर सकता है.
Trump ने दावा किया कि अमेरिका ने पहले ही ईरान की नौसेना, वायुसेना और उनके नेताओं को भारी नुकसान पहुँचाया है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब समझौता करना चाहता है. फिलहाल, ईरान के साथ बातचीत 9 जुलाई तक रुकी हुई है, ताकि दोनों तरफ से कोई हमला न हो.
जनाजे और बातचीत का माहौल
यह पूरा विवाद पूर्व सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei के जनाजे के दौरान शुरू हुआ, जो 4 से 6 जुलाई 2026 तक चला. इस दौरान भीड़ ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगाए. अब उम्मीद है कि 11 जुलाई से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू होगी, जिसमें प्रतिबंधों में ढील और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.
