ईरान ने अपने दुश्मनों को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उसके सरकारी और महत्वपूर्ण ठिकानों पर कोई हमला हुआ, तो वह जवाबी कार्रवाई में उनके बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से ठप कर देगा। ईरानी अधिकारियों ने साफ किया है कि देश के तेल, ऊर्जा और पानी से जुड़े ठिकानों की सुरक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। ईरान के सरकारी मीडिया और अधिकारियों के बयानों के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया है।

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ईरान ने जवाबी हमले को लेकर क्या बड़ी बात कही है?

ईरान के सैन्य और सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि अगर उनके ईंधन और ऊर्जा ठिकानों पर हमला होता है, तो वे इज़राइल और अमेरिका के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएंगे। इसमें ऊर्जा केंद्र, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सिस्टम और पानी साफ करने वाले प्लांट शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बिजली घरों पर हमला करना अपराध है और ईरान इसका बराबर जवाब देगा। अधिकारियों का कहना है कि उनकी मिसाइलें तैयार हैं और ज़रूरत पड़ने पर वे बिना किसी सीमा के कार्रवाई करेंगे। जनरल इब्राहिम ज़ोल्फ़ाघारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी भी गलती का नतीजा बहुत भारी होगा।

किन ठिकानों और समुद्री रास्तों पर इसका असर पड़ सकता है?

ईरानी अधिकारियों ने अपनी रणनीति को लेकर कुछ खास बातें साझा की हैं जो क्षेत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं:

  • तेल और ऊर्जा केंद्र: ईरान के तेल ठिकानों पर हमले की स्थिति में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कंपनियों से जुड़ी सुविधाओं को नष्ट करने की धमकी दी गई है।
  • Strait of Hormuz: ईरान ने कहा है कि यह समुद्री रास्ता खुला रहेगा, लेकिन दुश्मनों और उनके सहयोगियों के जहाज़ों को वहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • मिसाइल हमला: हाल ही में इज़राइल की ओर मिसाइलें दागे जाने की खबरें भी आई हैं, जिससे स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।
  • बातचीत से इनकार: ईरान के संसद अध्यक्ष और विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत होने की खबरों को पूरी तरह से खारिज किया है।

ईरानी पुलिस ने इस बीच उन लोगों को भी गिरफ्तार किया है जो ऑनलाइन माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि ईरान अपनी आर्थिक और ऊर्जा संपत्ति को बचाने के लिए जवाबी कार्रवाई की योजना पर तेज़ी से काम कर रहा है।