ईरान ने Strait of Hormuz में विदेशी सेनाओं की मौजूदगी को लेकर बहुत कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर का कहना है कि इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ वहां के तटवर्ती देशों की होनी चाहिए। इस बयान के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ तनाव और बढ़ गया है।

विदेशी सेनाओं को सख्त चेतावनी

ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Kazem Gharibabadi ने 3 और 4 जुलाई 2026 को यह चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा कि Strait of Hormuz बाहरी ताकतों के लिए अपनी सैन्य ताकत दिखाने की जगह नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विदेशी ताकतें यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि करती हैं, तो इसके नतीजे उन्हें खुद भुगतने होंगे।

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस पर निशाना

यह बयान तब आया जब अमेरिका के CENTCOM ने बहरीन में 12 देशों के सैन्य अधिकारियों के साथ एक मीटिंग की थी ताकि समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखा जा सके। साथ ही, ब्रिटेन और फ्रांस ने भी एक साझा घोषणा की थी कि वे नेविगेशन की आजादी के लिए एक मल्टीनेशनल मिलिट्री मिशन तैनात कर सकते हैं और ओमान के साथ मिलकर काम करेंगे। ईरान ने इन कदमों को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

ओमान के साथ मैनेजमेंट की योजना

ईरान और ओमान ने मस्कट में एक साझा समिति की पहली बैठक की। इस मीटिंग में तटवर्ती देशों के अधिकारों पर चर्चा हुई। ईरान चाहता है कि Strait of Hormuz का मैनेजमेंट ईरान और ओमान मिलकर करें और इसके लिए जहाजों से सर्विस फीस या टोल वसूला जाए। हालांकि, अरब देशों और अमेरिका ने इस मांग का विरोध किया है।

MOU और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता (MOU) साइन हुआ था। ईरान का दावा है कि इस समझौते के आर्टिकल 5 के मुताबिक इस रास्ते का मैनेजमेंट लंबे समय तक ईरान के पास रहेगा। जून के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच कुछ छोटी झड़पें भी हुई थीं।

दूसरी तरफ, ईरान के Khatam al-Anbiya सेंट्रल हेडक्वार्टर ने सख्त आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी जहाजों को ईरान द्वारा तय किए गए रास्तों पर ही चलना होगा। अगर कोई जहाज इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ तुरंत और कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी।