ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को अपने राजनीतिक फायदे के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। 8 जून से 12 जून 2026 तक चलने वाली IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव लाया जा रहा है, जिसका ईरान कड़ा विरोध कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री ने पत्र लिखकर क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने 10 जून 2026 को IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के विदेश मंत्रियों को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने अमेरिका द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस परमाणु संस्था का इस्तेमाल अपने गलत फैसलों को सही ठहराने के लिए कर रहा है। पिछले साल जून 2025 में भी ऐसा ही एक प्रस्ताव लाया गया था, जिसके बाद ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले हुए थे। ईरान का कहना है कि इन हमलों के लिए अमेरिका और इसराइल सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
अमेरिका और यूरोपीय देशों के इस प्रस्ताव में क्या है?
अमेरिका के साथ फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने मिलकर इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है। इस प्रस्ताव में ईरान से मांग की गई है कि वह अपने यूरेनियम स्टॉक और क्षतिग्रस्त परमाणु ठिकानों की पूरी जानकारी दे। साथ ही परमाणु निरीक्षकों को वहां जाने की इजाजत भी दी जाए। रूस और चीन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव जमीनी हकीकत को अलग तरीके से पेश करने की कोशिश है और वे इसके खिलाफ हैं।
ईरान के अन्य अधिकारियों ने क्या बयान दिए?
ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने आरोप लगाया है कि अमेरिका इस एजेंसी का इस्तेमाल उन लोगों को बचाने के लिए कर रहा है जिन्होंने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए। वियना में ईरान के मिशन ने भी इसे एक उकसावे वाला और गैर-जरूरी कदम बताया है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि उसके परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद जो हालात बने हैं, उसके लिए हमलावर जिम्मेदार हैं और इसके लिए ईरान पर दबाव नहीं बनाया जा सकता।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह पूरा मामला क्या है और IAEA की बैठक कब हो रही है?
यह मामला ईरान के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लाए जा रहे एक प्रस्ताव से जुड़ा है। IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की यह बैठक वियना में 8 जून से 12 जून 2026 तक चल रही है।
ईरान ने इस प्रस्ताव का विरोध क्यों किया है?
ईरान का मानना है कि अमेरिका और इसराइल ने उसके परमाणु ठिकानों पर हमले किए हैं। इस प्रस्ताव के जरिए अमेरिका उन हमलावरों को बचाने और परमाणु एजेंसी का इस्तेमाल कर ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
