ईरान के परमाणु ऊर्जा प्रमुख मोहम्मद एस्लामी ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को एक पत्र भेजकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा है कि परमाणु सुविधाओं जैसे बुशहर पावर प्लांट पर हो रहे हमलों के खिलाफ एजेंसी की चुप्पी हमलावरों के हौसले बढ़ा रही है। ईरान ने चेतावनी दी है कि परमाणु रिएक्टर से रेडियोधर्मी सामग्री का निकलना पर्यावरण और पड़ोसी देशों के लिए कभी न खत्म होने वाली परेशानी बन सकता है। पिछले कुछ हफ्तों में इस प्लांट के पास कई हमले हुए हैं जिससे तनाव काफी बढ़ गया है।

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परमाणु प्लांट पर हमले से क्या होगा असर?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को लिखे पत्र में साफ किया है कि बुशहर प्लांट पर हमले जारी रहे तो रेडिएशन का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि यह रेडिएशन तेहरान के बजाय खाड़ी देशों (GCC) की राजधानियों में जीवन समाप्त कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेसस ने भी इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी दुर्घटना का असर आने वाली कई पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि नागरिक परमाणु सुविधाओं पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और जिनेवा कन्वेंशन का सीधा उल्लंघन है।

बुशहर प्लांट पर हुए हमलों का पूरा ब्यौरा

ईरान के अनुसार बुशहर परमाणु संयंत्र के पास फरवरी 2026 से अब तक कई हमले हो चुके हैं। परमाणु ऊर्जा संगठन ने इन हमलों को लेकर IAEA की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। हाल की घटनाओं का विवरण इस प्रकार है:

तारीख मुख्य घटना
4 अप्रैल 2026 सुबह के समय हुए हमले में एक सुरक्षा गार्ड की मौत हुई और पास की संरचना को नुकसान पहुँचा।
5 अप्रैल 2026 ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमले को सामान्य बनाने की कोशिश बताया।
6 अप्रैल 2026 ईरान ने IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी को पत्र लिखकर ठोस कार्रवाई की मांग की।

IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने 4 अप्रैल के हमले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पुष्टि की है कि अभी तक रेडिएशन के स्तर में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है लेकिन उन्होंने सभी पक्षों से सैन्य संयम बरतने की अपील की है। रूस की कंपनी रोसाटोम जो इस प्लांट के संचालन में शामिल है उसने भी कुछ गैर-जरूरी कर्मचारियों को वहां से हटा लिया है। ईरान ने इन हमलों के लिए अमेरिका और इसराइल को जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को इस पर केवल चिंता जताने के बजाय कड़े कदम उठाने चाहिए।