ईरान की सेना ने इसराइल को सख्त चेतावनी दी है कि अगर लेबनान में सीज़फ़ायर यानी युद्धविराम का उल्लंघन किया गया तो इसका जवाब बहुत करारा होगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच क्षेत्रीय युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौता हुआ है। इस तनाव ने एक बार फिर मध्य पूर्व में हलचल बढ़ा दी है।

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क्या है पूरा विवाद

ईरान के टॉप जॉइंट मिलिट्री कमांड ‘खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ ने साफ कहा है कि लेबनान में इसराइल की किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बताया कि अमेरिका के साथ जो शुरुआती समझौता हुआ है, उसमें इसराइल का लेबनान से पीछे हटना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक इसराइल अपनी सेना लेबनान से नहीं हटाता, तब तक युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं माना जाएगा।

ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ परमाणु समझौता (nuclear deal) तभी अंतिम रूप देगा जब लेबनान से इसराइल की वापसी की गारंटी मिलेगी। वहीं ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि अभी सिर्फ एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, लेकिन अंतिम समझौता होना अभी बाकी है।

इसराइल और अमेरिका का रुख

दूसरी तरफ इसराइल ने इन मांगों को मानने से इनकार कर दिया है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि उनकी सेना लेबनान के बफ़र ज़ोन में तब तक रहेगी जब तक देश की सुरक्षा के लिए ज़रूरी होगा। वहीं सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने सीधे तौर पर कह दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समझौता उन पर लागू नहीं होता क्योंकि इसराइल इस डील का हिस्सा नहीं है।

इस मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी नाराजगी जताई है। G7 समिट के दौरान उन्होंने कहा कि लेबनान और हिज़बुल्लाह के साथ इसराइल का मामला बहुत लंबा खिंच रहा है और वह इस तरह के हालात से खुश नहीं हैं।

समझौते और उल्लंघन की मुख्य बातें

  • अमेरिका और ईरान के बीच समझौता (MOU) 14 जून 2026 को डिजिटल रूप से साइन हुआ था।
  • इस समझौते की औपचारिक साइनिंग 19 जून 2026 को स्विट्ज़रलैंड में होगी।
  • लेबनान के अधिकारियों ने बताया कि 17 अप्रैल से अब तक इसराइल ने 3,491 बार सीज़फ़ायर का उल्लंघन किया है, जिसमें हवाई हमले और ज़मीनी घुसपैठ शामिल हैं।