ईरान के कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल कानी ने इसराइल को बहुत सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने मांग की है कि इसराइली सेना दक्षिणी लेबनान से अपनी मर्जी से बाहर निकल जाए। कानी ने साफ कहा कि अगर इसराइल ने ऐसा नहीं किया, तो उसकी सेना को बहुत ही अपमानजनक तरीके से वहां से बाहर निकाला जाएगा।

ℹ: Oil Price Update: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत खत्म, कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 फीसदी की गिरावट

कमांडर इस्माइल कानी का बयान

इस्माइल कानी ने 19 से 22 जून 2026 के बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसराइली सैनिकों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर इसराइल खुद अपने पैरों पर चलकर लेबनान से बाहर नहीं निकला, तो साल 2000 वाला मंजर फिर से दिखेगा, जब इसराइल को बेइज्जती के साथ यह जमीन छोड़नी पड़ी थी। कानी ने यह भी दावा किया कि पिछले चार दिनों में इसराइल के 100 सैनिक मारे गए या घायल हुए हैं। उन्होंने हिजबुल्लाह के मिरसाद ड्रोन का जिक्र करते हुए कहा कि गाजा में भी ऐसा ही हालात बन सकते हैं।

ईरानी अधिकारियों का रुख

ईरान के एक वरिष्ठ राजनीतिक-सुरक्षा सूत्र ने अल मयादीन को बताया कि ईरान लेबनान में अपने दोस्तों को कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति सुधारने का समय बहुत कम बचा है। वहीं, ईरान के सलाहकार मोहसिन रजाई ने इन हमलों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वाशिंगटन ही इस तनाव के पीछे है। स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत के दौरान ईरानी अधिकारियों ने जोर दिया कि लेबनान से जुड़े समझौते का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।

इसराइल और अमेरिका की प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ, इसराइल के सैन्य मामलों के मंत्री इसराइल काट्ज़ ने दक्षिणी लेबनान से किसी भी तरह की वापसी का विरोध किया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी साफ कर दिया कि जब तक जरूरी होगा, इसराइल गाजा, सीरिया और लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम को बनाए रखने के लिए पिछले कुछ दिनों में अच्छी प्रगति हुई है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी कि वह अपने प्रॉक्सी समूहों को परेशानी खड़ा करने से रोके, वरना ईरान पर और हमले हो सकते हैं।

ताजा हालात और समझौता

बता दें कि 18 जून 2026 को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच एक समझौता (MoU) साइन हुआ था। इस समझौते का मकसद युद्ध को खत्म करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना था। इसमें सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत रोकने की बात कही गई थी। लेकिन इसके बावजूद, दक्षिणी लेबनान और पश्चिमी बेका में इसराइल के हमलों में कम से कम 37 लोग मारे गए, जिससे तनाव और बढ़ गया है।