खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के Khatam al-Anbiya Central Headquarters के प्रवक्ता Ebrahim Zolfaghari ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि जो भी देश अमेरिकी सेना को मदद या सहयोग देंगे, उसे ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला माना जाएगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर क्षेत्र में चल रहा तनाव और बढ़ा, तो इसकी आग पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लेगी।
🚨: अमेरिका और ईरान के बीच टूटा सीजफायर, खाड़ी देशों में युद्ध का खतरा बढ़ा।
हर्मुज जलडमरूमध्य और सैन्य तनाव
तनाव का मुख्य केंद्र Strait of Hormuz बना हुआ है, जिसे लेकर ईरान और अमेरिका के बीच खींचतान जारी है। 13 जुलाई 2026 को ईरान की Persian Gulf Strait Authority ने सुरक्षा कारणों से इस रास्ते को फिर से बंद करने की घोषणा की है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि अमेरिका इस रास्ते का नियंत्रण अपने हाथ में रखेगा। इससे पहले 12 जुलाई को CENTCOM ने ईरान के ठिकानों, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन सुविधाओं पर कई हवाई हमले किए थे।
प्रवासियों और शांति वार्ता पर असर
इस पूरे मामले में क्षेत्रीय अस्थिरता लगातार बढ़ती जा रही है। ब्रिटेन ने भी IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन हालातों को देखते हुए अमेरिका और ईरान के बीच 31 जुलाई 2026 तक शांति वार्ता होने की संभावना घटकर मात्र 33 प्रतिशत रह गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि बढ़ते सैन्य टकराव का सीधा असर सुरक्षा और व्यापारिक आवाजाही पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी बढ़ते संघर्ष के भयानक परिणामों के प्रति सचेत किया है।
