ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने रविवार, 7 जून 2026 को एक बड़ा बयान देकर हलचल मचा दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों के पास पूरे क्षेत्र में अमेरिकी और इसराइली ठिकानों और संपत्तियों पर हमला करने की पूरी छूट है। यह बयान लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहियाह पर इसराइली हमले और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों के बाद आया है।

ईरान ने अमेरिकी और इसराइली ठिकानों को क्यों बताया जायज निशाना?

संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ के अनुसार, ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा की गई समुद्री नाकेबंदी और इसराइल को दी गई खुली छूट ने इन दोनों देशों के ठिकानों को वैध निशाना बना दिया है। गालिबफ ने अपने बयान में निम्नलिखित मुख्य बातें कही हैं:

  • उनका मानना है कि अमेरिका और इसराइल कभी भी युद्धविराम का पालन नहीं करते और न ही बातचीत में विश्वास रखते हैं।
  • उन्होंने कहा कि ये दोनों देश केवल ताकत की भाषा समझते हैं।
  • खबरों के अनुसार, गालिबफ ने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर इसराइली हमले जारी रहे, तो ईरान बातचीत की प्रक्रिया को पूरी तरह रोक देगा और सीधे सैन्य मुकाबले में उतरेगा।

क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव और अन्य महत्वपूर्ण अपडेट

इस बयान के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं और पिछले 24 घंटों में कई बड़े अपडेट सामने आए हैं:

  • अमेरिकी सेना ने सुरक्षा कार्रवाई करते हुए ईरान के छह वन-वे हमलावर ड्रोन को मार गिराया है और कई बैलिस्टिक मिसाइलों को भी हवा में नष्ट कर दिया है।
  • दूसरी तरफ लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने ईरान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • लेबनानी प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया है कि ईरान अपने निजी हितों और अमेरिका के साथ बातचीत में फायदे के लिए लेबनान का इस्तेमाल एक मोहरे के रूप में कर रहा है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान के संसद अध्यक्ष ने अमेरिकी और इसराइली संपत्तियों के बारे में क्या कहा?

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने कहा कि ईरानी सेना के पास पूरे क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी और इसराइली ठिकानों और संपत्तियों पर हमला करने का पूरा अधिकार है।

यह नया विवाद किस वजह से शुरू हुआ है?

यह विवाद बेरूत के दहियाह इलाके पर इसराइली हमले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और ईरान के खिलाफ अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी के कारण शुरू हुआ है।