ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में सीजफायर के नियमों को तोड़ने पर ईरान चुप नहीं बैठेगा और इसका जवाब जरूर देगा। Ghalibaf ने मंगलवार को एक इंटरव्यू में कहा कि हाल की घटनाओं ने युद्ध खत्म करने के पुराने समझौते को तोड़ दिया है।
समझौते में गड़बड़ी और विवाद
यह पूरा मामला ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MOU) से जुड़ा है। इस समझौते पर 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साइन किए थे। इसका मकसद सीजफायर करना, Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करना और परमाणु डील के लिए 60 दिन की बातचीत करना था।
ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने इस समझौते के कई नियमों को तोड़ा है, जिनमें ये मुख्य बातें शामिल हैं:
- लेबनान में लगातार हमले होना, जबकि समझौते में लड़ाई रोकने की बात थी।
- ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन का घुसना।
- ईरान के यूरेनियम enrichment के अधिकार को न मानना।
- 27 और 28 जून 2026 को फारस की खाड़ी में हुए हमले।
- ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी करना।
बढ़ता सैन्य तनाव
पिछले वीकेंड पर दोनों देशों के बीच तनाव बहुत बढ़ गया। अमेरिका ने बताया कि ईरान ने दो कार्गो जहाजों पर हमला किया, जिसके जवाब में US Central Command ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने बहरीन (Bahrain) और कुवैत (Kuwait) में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
नेताओं के कड़े बयान
ईरान के स्पीकर Ghalibaf ने मंगलवार को साफ किया कि जब तक MOU की शर्तें पूरी नहीं होंगी, ईरान कोई बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जो युद्ध के लिए तैयार होता है, वही अच्छी बातचीत कर सकता है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा आएगा जब वे नरम नहीं रहेंगे और सैन्य कार्रवाई करेंगे, जिससे ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान’ का अस्तित्व खत्म हो सकता है।
कतर की मीटिंग और जहाजों की आवाजाही
कतर (Qatar) में होने वाली बातचीत को लेकर भी दोनों देशों की बातें अलग-अलग हैं। राष्ट्रपति Trump ने दावा किया कि ईरान ने मीटिंग की मांग की है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे गलत बताया। ईरान ने कहा कि उनकी टीम सिर्फ फ्रीज किए हुए पैसों को छुड़ाने की बात करने गई है।
इस तनाव की वजह से Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है। शनिवार को एक जहाज पर हमले के बाद डर बढ़ गया है और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जहाजों को चेतावनी जारी की है।
