ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हाल ही में दोनों देशों ने शांति के लिए एक समझौते (MoU) पर साइन किए थे, लेकिन अब अमेरिकी अधिकारियों के बयानों को लेकर विवाद शुरू हो गया है। ईरान का कहना है कि वॉशिंगटन से आने वाले अलग-अलग संदेशों की वजह से भरोसा कम हो रहा है और इससे कूटनीतिक माहौल खराब होगा।
बयानों को लेकर विवाद
24 जून 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने चेतावनी दी कि अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी बयान अविश्वास की खाई को और गहरा कर रहे हैं। उन्होंने साफ़ कहा कि ऐसी बातें पुराने टूटे हुए वादों की याद दिलाती हैं। Baqaei ने जोर दिया कि रिश्ता तभी आगे बढ़ेगा जब दोनों पक्ष अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेंगे। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की आलोचना करते हुए कहा कि जब तक अमेरिका का हस्तक्षेप जारी रहेगा, क्षेत्र में शांति नहीं आ सकती।
परमाणु निरीक्षण पर खींचतान
परमाणु निरीक्षण को लेकर दोनों देशों के दावों में बड़ा अंतर है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और उपराष्ट्रपति JD Vance ने दावा किया कि ईरान परमाणु निरीक्षण के उच्चतम स्तर के लिए तैयार हो गया है। लेकिन ईरान के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने इन दावों को गलत बताया। उन्होंने साफ़ किया कि IAEA के निरीक्षकों के लिए कोई नई योजना नहीं है और न ही IAEA प्रमुख के साथ कोई बैठक हुई है।
संपत्ति और व्यापार पर टकराव
ईरान की जमी हुई संपत्ति (Frozen Assets) को लेकर भी विवाद चल रहा है। Donald Trump ने सुझाव दिया कि इन पैसों का इस्तेमाल अमेरिकी खेती के उत्पाद खरीदने के लिए किया जाए और यह नियंत्रण अमेरिका और कतर के पास रहे। वहीं, ईरान के राजदूत Ali Bahreini ने कहा कि संपत्ति छूटने के बाद उसका इस्तेमाल कैसे करना है, इसका फैसला सिर्फ ईरान करेगा।
अन्य मुख्य विवाद
- Strait of Hormuz: अमेरिका के Marco Rubio ने कहा कि ईरान को जलमार्ग के लिए टोल वसूलने की अनुमति नहीं होगी, जबकि ईरान ने ओमान के साथ मिलकर सेवाओं के लिए शुल्क लेने का संकेत दिया है।
- मिसाइल प्रोग्राम: ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ़ किया कि उनके देश की मिसाइलें इस समझौते (MoU) का हिस्सा नहीं थीं और न ही कभी होंगी।
- सैन्य रुख: ईरानी सेना के जनरल Ahmad Reza Pourdastan ने बताया कि अब उनकी सेना ने अपनी रणनीति बदल ली है और अब वे ‘ऑफेंसिव डॉक्ट्रिन’ यानी हमलावर रुख अपना रहे हैं।
बता दें कि 17 जून 2026 को Donald Trump और Masoud Pezeshkian ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से इस समझौते पर साइन किए थे ताकि युद्ध खत्म हो सके। अब दोनों देशों के पास एक स्थायी डील तक पहुँचने के लिए 60 दिनों का समय है, लेकिन आपसी अविश्वास इस रास्ते में बड़ी बाधा बना हुआ है।
