ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है. ईरान के टॉप नेगोशिएटर और पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा कि अगर अमेरिका या उसके साथियों ने समझौते के साथ धोखाधड़ी की या कोई नई मांग रखी, तो ईरान उन्हें करारा जवाब देगा.
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क्या है पूरा मामला
17 जून 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ पर डिजिटल हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते का मुख्य मकसद युद्ध को खत्म करना और Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू करना था. इसके बाद 18 जून को अमेरिका ने ईरान की समुद्री नाकाबंदी हटा ली, जिससे तेल टैंकर अब इस रास्ते से आसानी से गुजर रहे हैं और क्षेत्र में सुरक्षा का खतरा ‘मध्यम’ स्तर पर आ गया है.
इस समझौते को एक विस्तृत डील में बदलने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है, जिसकी शुरुआत 18 जून 2026 से हुई. ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Mojtaba Khamenei ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत की मंजूरी तो दी, लेकिन उन्होंने आगाह किया कि इन बातचीत को अमेरिका के नजरिए को स्वीकार करना न समझा जाए.
ईरान और अमेरिका के कड़े तेवर
- मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि अगर अमेरिका अपने वादों को पूरा नहीं करेगा, तो ईरान भी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करेगा.
- उन्होंने यह भी साफ किया कि 60 दिनों की फ्री अवधि खत्म होने के बाद, ईरान Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलेगा क्योंकि इस रास्ते पर उनका संप्रभु अधिकार है.
- गालिबाफ ने इस शुरुआती समझौते को अमेरिका के लिए एक ‘नाकामी’ और ईरान के लिए एक ‘डिप्लोमैटिक जीत’ बताया है.
- दूसरी तरफ, राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि यह अभी फाइनल डील नहीं है और अगर ईरान ने सही व्यवहार नहीं किया, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है.