ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। ईरान ने साफ़ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर युद्धविराम के नियमों को दोबारा तोड़ा गया, तो वह इसका बहुत भयानक और करारा जवाब देगा। हाल ही में अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य हमलों के बाद अब ईरान ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं।

दोनों देशों के बीच 18 जून 2026 को एक समझौता हुआ था, जिसे ‘इस्लामाबाद अंडरस्टैंडिंग’ कहा जाता है। इस समझौते का मकसद सभी मोर्चों पर लड़ाई को रोकना था। लेकिन 25 जून को अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में M/V Ever Lovely नाम के एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन से हमला किया। इसके जवाब में अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने 26 जून को ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट्स पर हमले कर दिए।

तनाव तब और बढ़ गया जब 27 जून को अमेरिका ने एक और हमला किया। अमेरिका का कहना था कि ईरान ने M/T Kiku नाम के ऑयल टैंकर पर हमला कर युद्धविराम का उल्लंघन किया है। इस घटना के बाद ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ibrahim al-Fiqar ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया कि किसी भी नए हमले का जवाब पहले से कहीं ज्यादा कठोर और अभूतपूर्व होगा। उन्होंने कहा कि युद्धविराम तोड़ना समझौते के आर्टिकल 1 का उल्लंघन है और इससे सारी बातचीत बंद हो जाएगी।

कुवैत और बहरीन में भी हुए हमले

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी हमलों का बदला लेने के लिए कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर आगे भी नियमों का उल्लंघन हुआ, तो वे अपनी कार्रवाई और तेज करेंगे। साथ ही, उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को अब ईरान ही कंट्रोल करेगा।

ईरानी अधिकारियों के कड़े बयान

ईरान के कई बड़े नेताओं ने अमेरिका को चेतावनी दी है:

  • Mohsen Rezaei: उन्होंने कहा कि अमेरिका ने समझौते के आर्टिकल 1 और 5 को तोड़ा है और इसका जवाब बहुत जल्द और सख्त होगा।
  • Mohammad Bagher Ghalibaf: संसद अध्यक्ष ने कहा कि ईरान समझौते का पालन करना चाहता है, लेकिन वॉशिंगटन की किसी भी गलत हरकत का जवाब ताकत के साथ दिया जाएगा।
  • Ebrahim Azizi: उन्होंने अमेरिका पर युद्धविराम के नियमों की लापरवाही से अनदेखी करने का आरोप लगाया।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा किए गए हमले आत्मरक्षा के लिए थे, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत जायज हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की इन हरकतों को मूर्खतापूर्ण बताया है।