ईरान की सेना ने अमेरिका और इसराइल के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उनके ऊर्जा ठिकानों या बुनियादी ढांचे पर कोई हमला हुआ, तो वह अमेरिका और इसराइल के ठिकानों के साथ-साथ उन देशों पर भी हमला करेगा जहाँ अमेरिकी सेना मौजूद है। खाड़ी के देशों को साफ़ शब्दों में अल्टीमेटम दिया गया है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी फौज को अपने यहाँ से बाहर निकालें वरना उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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ईरान की सेना ने क्या चेतावनी दी है?

ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने एक बयान जारी कर कहा है कि अगर अमेरिका ईरान के पुलों, बिजली घरों या ऊर्जा क्षेत्रों को निशाना बनाता है, तो ईरान की सेना विनाशकारी हमले करेगी। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह न केवल अमेरिकी और इसराइली संपत्तियों को निशाना बनाएगा, बल्कि उन देशों के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर भी हमला करेगा जो अमेरिका को अपनी ज़मीन और सैन्य बेस इस्तेमाल करने दे रहे हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत जैसे देशों को इस खतरे के बारे में सीधे तौर पर आगाह किया गया है।

क्षेत्र में हालिया तनाव और ताजा घटनाक्रम

क्षेत्र में तनाव के चलते पिछले कुछ दिनों में कई बड़ी घटनाएं हुई हैं जिनका विवरण इस प्रकार है।

  • 3 अप्रैल 2026: कुवैत में एक पानी के प्लांट और बिजली घर पर हमले की खबर मिली है।
  • विमान गिराने का दावा: ईरान का दावा है कि उसने अमेरिका के ए-10 और एक एफ-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया है।
  • समुद्री रास्ता: ईरान के संसद अध्यक्ष ने संकेत दिया है कि वे बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद कर सकते हैं, जिससे समुद्री व्यापार प्रभावित होगा।
  • पृष्ठभूमि: यह विवाद 28 फरवरी 2026 को हुए हवाई हमले के बाद से बढ़ा है, जिसमें ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता की मौत की खबर आई थी।

भारतीय प्रवासियों और आम जनता पर इसका असर

खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। अगर ईरान बिजली घरों और पानी के प्लांट जैसे बुनियादी ढांचों को निशाना बनाता है, तो वहाँ रह रहे प्रवासियों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर भारी असर पड़ेगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जो देश अमेरिकी सेना की मेज़बानी कर रहे हैं, वे अपनी ज़मीन से उन्हें हटा दें ताकि वे इस युद्ध की चपेट में न आएं। इस तनाव से हवाई यात्रा और समुद्री व्यापार भी महंगा हो सकता है, जिससे भारत और खाड़ी के बीच सामान की आवाजाही पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.