ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिका और इसराइल को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और लेबनान में इसराइली हमलों को अमेरिका से मिली हरी झंडी के कारण मिडल ईस्ट में अमेरिकी ठिकाने और इसराइली संपत्तियां अब हमारे लिए वैध निशाना बन चुकी हैं। ईरान ने साफ किया है कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे, तो वे बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद कर सीधे दुश्मन के खिलाफ मैदान में उतरेंगे।
ईरान ने अमेरिका और इसराइल को लेकर क्या बड़ा बयान दिया?
ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने 7 जून 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका और इसराइल केवल ताकत की भाषा समझते हैं। अमेरिका द्वारा की जा रही ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी और लेबनान पर इसराइली हमलों को दी जा रही ढील अब बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है। इस वजह से मिडल ईस्ट के सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस और इसराइली ठिकाने अब ईरान के निशाने पर आ चुके हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ये हरकतें बंद नहीं हुईं, तो ईरान सीधे टकराव के रास्ते पर आगे बढ़ेगा।
लेबनान पर इसराइली हमले और अमेरिकी नाकाबंदी की ताज़ा स्थिति क्या है?
मिडल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। हालिया घटनाक्रम को नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- बेरूत पर हमला: 7 जून 2026 को इसराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हवाई हमले किए। इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और ग्यारह लोग घायल हुए हैं।
- अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी: अमेरिकी सेंट्रल कमांड की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल के मध्य से अब तक अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की तरफ जाने वाले या वहां से आने वाले 129 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदला है और नाकाबंदी के नियमों का पालन कराने के लिए छह जहाजों को निष्क्रिय भी किया है। इस नाकाबंदी से ईरान के तेल निर्यात पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
- वार्ता में रुकावट: अमेरिका और ईरान के बीच प्रतिबंधों को हटाने और ईरानी संपत्तियों को जारी करने को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन नए विवादों के बाद इस वार्ता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
क्या खाड़ी देशों में फिर से बढ़ेगा तनाव?
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े मीडिया चैनलों ने संकेत दिए हैं कि ईरान बेरूत पर हुए इसराइली हमलों का बदला जरूर लेगा। इससे पहले जून की शुरुआत में भी ईरान समर्थित ताकतों ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। इसके अलावा, लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह ने भी 4 जून 2026 को अमेरिका के संघर्ष विराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और मांग की थी कि इसराइल पूरी तरह से अपनी आक्रामकता रोके और सेना पीछे हटाए। इस तनाव से पूरे खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान के वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबफ ने क्या बयान दिया है?
उन्होंने कहा कि अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी और लेबनान में इसराइली हमलों के कारण मिडल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और इसराइली संपत्तियां अब ईरान के लिए वैध निशाना बन गई हैं।
क्या हाल ही में बेरूत पर कोई हमला हुआ है?
हां, 7 जून 2026 को इसराइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हमले किए, जिसमें कम से कम दो लोगों की जान चली गई और ग्यारह लोग घायल हो गए।
अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी का ईरान पर क्या असर पड़ा है?
इस नाकाबंदी के कारण अप्रैल के मध्य से अब तक 129 जहाजों का रास्ता बदला गया है, जिससे ईरान के तेल निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
