ईरान ने अमेरिका और इसराइल को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान का कहना है कि अगर अब कोई नया हमला हुआ तो उसका जवाब इतना कड़ा और निर्णायक होगा कि दुश्मन उसे याद रखेगा। यह तनाव उस वक्त बढ़ा है जब दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते लगभग बंद होते दिख रहे हैं।

ईरान ने हमले पर क्या चेतावनी दी है?

ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता Brigadier General Reza Talaei-Nik ने मंगलवार को साफ शब्दों में कहा कि किसी भी खतरे या हमले का जवाब तुरंत और निर्णायक तरीके से दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका और इसराइल को ईरान के जायज अधिकारों को स्वीकार करना होगा, चाहे वह बातचीत से हो या युद्ध के मैदान में।

  • प्रवक्ता ने कहा कि दुश्मन का हमला ‘अंतिम और पछतावा पैदा करने वाला’ होगा।
  • उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी जहाजों का टकराव वाले इलाकों से पीछे हटना ईरान की ताकत और तैयारी का सबूत है।
  • ईरान का मानना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो दुश्मन को और सैन्य हार का सामना करना पड़ेगा।

ईरान की मांगें क्या हैं और अमेरिका का क्या कहना है?

ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को अपना जवाब भेजा था, जिसमें युद्ध को रोकने के लिए कुछ शर्तें रखी गई थीं। ईरान की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग।
  • Strait of Hormuz पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना।
  • ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना।
  • ईरान की जमी हुई संपत्तियों को वापस लौटाना।

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के इस जवाब को पूरी तरह से ‘अस्वीकार्य’ बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अब युद्धविराम (ceasefire) खत्म होने की कगार पर है। वहीं, पूर्व IRGC कमांडर मोहम्मद अली जाफरी ने कहा है कि जब तक शर्तें पूरी नहीं होंगी, कोई बातचीत नहीं होगी। हालांकि, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन उन्होंने वाशिंगटन पर गहरा अविश्वास भी जताया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने अमेरिका और इसराइल से क्या मांग की है?

ईरान ने युद्ध के नुकसान का मुआवजा, प्रतिबंध हटाना, अपनी जमी हुई संपत्ति वापस लेना और Strait of Hormuz पर अपने अधिकार की मान्यता मांगी है।

ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ कौन बना था?

ईरान ने अपने जवाब को अमेरिका तक पहुँचाने के लिए पाकिस्तान की मदद ली थी और पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए अपना प्रस्ताव भेजा था।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.