ईरान ने अमेरिका को एक बड़ी चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने पड़ोसी देशों के आसमान में उड़ रहे इसराइल के सैन्य विमानों को नहीं रोका, तो वह चुप नहीं बैठेगा। इस चेतावनी के बाद पूरे इलाके में सैन्य हलचल और तनाव बढ़ गया है।

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ईरान ने क्या कहा

ईरान के सशस्त्र बलों की एकीकृत कमांड, Khatam al-Anbia Central Headquarters ने 26 जून 2026 को साफ कहा कि पड़ोसी देशों के आसमान में सैन्य विमानों की मौजूदगी ईरान की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका इसराइल के विमानों पर नियंत्रण नहीं रख पाया, तो ईरान अपनी सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई करने का पूरा हक रखता है।

समझौते और तनाव की स्थिति

हाल ही में 17 और 18 जून 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक समझौता (MOU) साइन किया था। इस समझौते का मकसद युद्ध को खत्म करना और शांति लाना था। इसके तहत ईरान अपने यूरेनियम के भंडार को कम करने और अमेरिका द्वारा तेल प्रतिबंध हटाने पर बात हुई थी। लेकिन इसराइल के कदमों की वजह से यह समझौता खतरे में दिख रहा है।

लेबनान और अन्य विवाद

  • लेबनान मामला: ईरान ने कहा कि बेरूत या दक्षिण लेबनान में किसी भी तरह की इसराइली आक्रामकता को वह बर्दाश्त नहीं करेगा।
  • मिसाइल प्रोग्राम: ईरानी अधिकारी Ali Shamkhani ने साफ किया कि ईरान का मिसाइल प्रोग्राम किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं होगा और यह उनके लिए एक ‘रेड लाइन’ है।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि Strait of Hormuz को बिना अनुमति पार करने वाले जहाजों से निपटा जाएगा।

क्षेत्रीय प्रभाव

ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि अगर शत्रुता जारी रही, तो पूरे इलाके में मौजूद अमेरिकी और इसराइली सैन्य ठिकाने उनके निशाने पर रहेंगे। वहीं, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi ने कहा कि इस विवाद के बाद ईरान में परमाणु हथियारों को रोकने के लिए एक बहुत मजबूत जांच सिस्टम की जरूरत है।