ईरान के विदेश मंत्री Seyyed Abbas Araghchi ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि लेबनान में चल रहे युद्ध को रोकने की पूरी ज़िम्मेदारी अमेरिका की है. उन्होंने यह बात पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Mohammad Ishaq Dar के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान कही. ईरान का कहना है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म कराने की प्रतिबद्धता अमेरिका की है.
मामला तब गरमाया जब 19 जून 2026 को इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच हुए युद्धविराम (Ceasefire) के नियमों का उल्लंघन होने की खबरें आईं. ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए डिजिटल समझौते यानी Memorandum of Understanding (MoU) का कोई भी उल्लंघन हुआ, तो उसका सीधा ज़िम्मेदार अमेरिका होगा.
क्या है ‘इस्लामाबाद समझौता’ (Islamabad MoU)
बता दें कि 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक अहम समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर किए थे. इसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ कहा जा रहा है. इस समझौते की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत रोकना.
- अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की बातचीत की समय सीमा तय करना.
- हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलना.
- ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Mojtaba Khamenei ने पहली बार अमेरिका के साथ सीधी बातचीत को मंजूरी दी.
इस समझौते के बाद 19 जून 2026 की दोपहर 4 बजे इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू हुआ था. हालांकि, इस बीच हिजबुल्लाह ने चार इजरायली सैनिकों को मार गिराया और इजराइल ने जवाबी हमले में लेबनान के कम से कम 47 लोगों की जान ले ली. इस हिंसा की वजह से स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों की बैठक को भी टाल दिया गया है.
इजराइल और लेबनान का क्या कहना है
इजराइल के अमेरिकी राजदूत Yechiel Leiter ने कहा कि उनका देश युद्धविराम के लिए प्रतिबद्ध है, बशर्ते हिजबुल्लाह इसे न तोड़े. उन्होंने यह भी साफ किया कि इजराइल इस लेबनान मामले में अमेरिका और ईरान के बीच हुए MoU से बंधा हुआ नहीं है और उसकी सेना दक्षिण लेबनान के बफर ज़ोन में तैनात रहेगी.
दूसरी तरफ, लेबनान के संसद स्पीकर Nabih Berri ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि लेबनान और हिजबुल्लाह युद्धविराम का पालन करने के लिए तैयार हैं ताकि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ सके.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि मंत्री Mohammad Ishaq Dar और Araghchi ने लेबनान की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है. पाकिस्तान ने ईरान को अमेरिका के साथ इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए बधाई भी दी है.