अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है, जिस पर अब ईरान ने पलटवार करने की चेतावनी दी है. इस खींचतान का असर समुद्री रास्तों और व्यापार पर पड़ सकता है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें इस इलाके पर टिकी हैं.
ईरान ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी है?
ईरान के सैन्य अधिकारियों ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका ने बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी, तो ईरान भी कड़ा कदम उठाएगा. मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने चेतावनी दी कि ईरान फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर में सभी आयात और निर्यात को रोक सकता है. ईरान के सैन्य कमांड ने अमेरिका की इस कार्रवाई को समुद्री डकैती बताया है.
Strait of Hormuz से गुजरने के लिए ईरान की शर्तें क्या हैं?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि Strait of Hormuz व्यावसायिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है. लेकिन ईरान ने इसके लिए कुछ शर्तें रखी हैं. केवल कमर्शियल जहाजों को आने दिया जाएगा और सैन्य जहाजों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. साथ ही, जहाजों और उनके सामान का संबंध किसी दुश्मन देश से नहीं होना चाहिए और उन्हें ईरान द्वारा तय किए गए रास्तों पर ही चलना होगा.
अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या स्थिति है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान के साथ कोई बड़ा समझौता नहीं हो जाता, तब तक बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रहेगी. वहीं, यूरोपीय देश जैसे फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली ने पेरिस में बैठक कर सुरक्षित रास्ता निकालने पर चर्चा की है. शिपिंग कंपनियों ने भी चेतावनी दी है कि समुद्र में माइन्स का खतरा हो सकता है, इसलिए जहाजों को सावधानी बरतनी होगी.
| तारीख | मुख्य घटना |
|---|---|
| 13 अप्रैल 2026 | अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी शुरू की |
| 15 अप्रैल 2026 | ईरान ने फारस की खाड़ी और लाल सागर में व्यापार रोकने की चेतावनी दी |
| 16 अप्रैल 2026 | अमेरिकी रक्षा सचिव ने कहा कि नाकेबंदी लंबे समय तक चल सकती है |
| 17 अप्रैल 2026 | ईरान ने Strait of Hormuz को कमर्शियल जहाजों के लिए खोलने का ऐलान किया |
| 17 अप्रैल 2026 | डोनाल्ड ट्रम्प ने नाकेबंदी जारी रखने की बात कही |
| 17 अप्रैल 2026 | CENTCOM ने बताया कि 19 जहाज नाकेबंदी के कारण वापस लौट गए |
| 17 अप्रैल 2026 | यूरोपीय देशों ने सुरक्षित नेविगेशन के लिए पेरिस में बैठक की |
