ईरान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, देश का पूरा ध्यान अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए सबसे सही तरीके अपनाने पर है। हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है और अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
ईरान ने बातचीत के लिए रखीं कौन सी कड़ी शर्तें?
ईरान ने अमेरिका के सामने अपनी शर्तें बहुत स्पष्ट रूप से रख दी हैं। ईरान इन शर्तों पर ही बातचीत आगे बढ़ाने के पक्ष में है:
- सभी मोर्चों पर जंग रोकना: इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर लड़ाई को पूरी तरह रोकना शामिल है।
- हमलों की गारंटी: भविष्य में अमेरिका और इसराइल की तरफ से किसी भी हमले को रोकने की पक्की गारंटी चाहिए।
- नुकसान की भरपाई: ईरान ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अधिकार: हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान की संप्रभुता को स्वीकार करना होगा।
- फ्रीज की गई संपत्ति की वापसी: बातचीत शुरू होने से पहले ईरान के रोके गए पैसों (frozen assets) को छोड़ना होगा।
- परमाणु कार्यक्रम पर कोई बात नहीं: ईरान इस चरण में अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई भी चर्चा नहीं करेगा।
अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान क्यों बरत रहा है सावधानी?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बताया है कि अमेरिका पहले भी अपने वादों से पीछे हट चुका है। बातचीत के दौरान भी ईरान पर हमले और अधिकारियों को निशाना बनाने की घटनाएं हुई हैं। इसी वजह से ईरान अब अमेरिका के साथ बातचीत में बहुत ज्यादा सावधानी बरत रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने साफ किया है कि कूटनीति का इस्तेमाल केवल तभी किया जाएगा जब परिस्थितियां ईरान के हितों के अनुकूल होंगी। ईरान के सभी फैसले सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के ढांचे के तहत लिए जाते हैं।
रक्षा तैयारियों को लेकर सेना का बड़ा बयान
ईरान की सेना ने अमेरिका को किसी भी तरह की सैन्य गलती के खिलाफ चेतावनी दी है। सैन्य कमांडरों का कहना है कि उनके सुरक्षा बल किसी भी नए हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। वहीं देश की संसद के डिप्टी स्पीकर ने भी कहा है कि दुश्मन देश पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए ईरान को अपनी रक्षा और हमला करने दोनों क्षमताओं को मजबूत करना होगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए तैयार है?
नहीं, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत के इस मौजूदा चरण में अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई भी चर्चा नहीं करेगा।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में कौन मध्यस्थता कर रहा है?
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही इस बातचीत में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।