तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के जमीनी टकराव के लिए पूरी तरह से तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि अगर उन पर जमीनी हमला होता है, तो उनकी सेना उसका मजबूती से जवाब देगी। ईरान का कहना है कि हमला करने वालों को इस बार भारी नुकसान उठाना पड़ेगा और उनके सैनिकों को वापस जाना मुश्किल हो जाएगा। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और अमेरिकी सेना की हलचल बढ़ गई है।

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ईरानी नेताओं और अधिकारियों ने क्या चेतावनी दी है?

ईरान के अलग-अलग नेताओं और सैन्य अधिकारियों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों के बयानों में साफ तौर पर युद्ध की तैयारी की बात कही गई है। प्रमुख बयान नीचे दिए गए हैं:

  • अब्बास अराघची (विदेश मंत्री): उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी जमीनी अभियान का इंतजार कर रहा है और यह अमेरिका के लिए एक बड़ी आपदा साबित होगा। उन्होंने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया है।
  • मोहम्मद बाकर गलीबाफ (संसद अध्यक्ष): उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हमला हुआ तो अमेरिकी सैनिकों को आग में झोंक दिया जाएगा और उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को हमेशा के लिए सजा मिलेगी।
  • मसूद पेजेशकियन (राष्ट्रपति): उन्होंने खाड़ी देशों को सावधान किया है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए न होने दें, वरना उन्हें भी कठोर प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
  • इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC): सैन्य संगठन ने अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है और कहा है कि हर एक हत्या के बदले एक अमेरिकी कंपनी को नष्ट किया जाएगा।

क्षेत्र में मौजूदा स्थिति और हालिया सैन्य घटनाक्रम

पिछले 24 से 48 घंटों में ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच कई सैन्य गतिविधियां दर्ज की गई हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस्फ़हान के पास एक अमेरिकी-इजरायली ड्रोन को मार गिराया है। दूसरी ओर, खाड़ी देशों ने भी सुरक्षा कड़ी कर दी है।

तारीख मुख्य घटना
31 मार्च 2026 ईरान ने अमेरिकी-इजरायली MQ-9 रीपर ड्रोन को नष्ट करने की घोषणा की।
31 मार्च 2026 यूएई ने ईरान की ओर से दागी गई 8 बैलिस्टिक मिसाइलों और 36 ड्रोन को हवा में ही रोक दिया।
30 मार्च 2026 अमेरिका की 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट मध्य पूर्व के इलाके में पहुंची।
30 मार्च 2026 पेंटागन ने संकेत दिया कि वे 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को क्षेत्र में तैनात करने पर विचार कर रहे हैं।

ईरान के सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका ने जमीनी हमला किया, तो ईरान जवाबी कार्रवाई में कुछ तटीय इलाकों पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे पड़ोसी देशों ने ईरान की इन गतिविधियों पर चिंता जताई है और रेड लाइन पार करने की बात कही है। प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि तनाव बढ़ने से हवाई सेवाओं और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।