Muslim Defence Pact: मक्का समझौते पर ईरान ने दी अपनी प्रतिक्रिया, मुस्लिम देशों की एकजुटता पर दिया जोर

Sushma Kumari8 August 20262 min read88 viewsWorld
Muslim Defence Pact: मक्का समझौते पर ईरान ने दी अपनी प्रतिक्रिया, मुस्लिम देशों की एकजुटता पर दिया जोर

पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों के बीच हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में आपसी सुरक्षा को मजबूत करना और किसी भी बाहरी हमले का मिलकर सामना करना है। इस समझौते के बाद से क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

समझौते की अहमियत और ईरान का रुख

ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने इस समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने 8 अगस्त, 2026 को दी गई अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा कि जब मुस्लिम देश एक साथ खड़े होते हैं, तो वे बाहरी चुनौतियों का सामना मजबूती से कर सकते हैं। ANI News की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस्लामिक देशों को अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय आपस में भाईचारा कायम रखना चाहिए। साथ ही, उन्होंने ईरान की सैन्य शक्ति की तारीफ करते हुए कहा कि उनके सशस्त्र बल दुनिया की सबसे महंगी सेनाओं के सामने भी पूरी तरह से सक्षम हैं।

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क्या है मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट

यह एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता है जिसमें सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान शामिल हैं। इस समझौते की शर्तों के तहत, यदि इन तीनों देशों में से किसी एक पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। सऊदी अरब के उप-मंत्री Rayed Krimly ने स्पष्ट किया है कि यह किसी गुटबाजी या संप्रदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि एक रक्षात्मक कदम है। यह समझौता पिछले साल सितंबर 2025 में हुए सऊदी-पाकिस्तान रक्षा सहयोग का एक विस्तार है। तुर्की के अधिकारियों ने भी इसे पूरी तरह से बचाव के लिए बनाया गया ढांचा बताया है।

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच नई हलचल

एक तरफ जहां इस समझौते को लेकर कूटनीतिक चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हुआ है। 7 अगस्त, 2026 को अमेरिका ने ईरान के बैंकिंग सिस्टम और कई कंपनियों पर नए प्रतिबंध लागू किए हैं। इससे पहले, 1-2 अगस्त, 2026 को ईरानी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। हालांकि, ईरान के कुछ अन्य अधिकारियों और कट्टरपंथियों ने इस समझौते को लेकर संदेह भी जताया है, जिससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय राजनीति में अभी भी कई तरह के विरोधाभास मौजूद हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रक्षा समझौता मध्य पूर्व की शांति और स्थिरता में क्या भूमिका निभाता है और इसका असर आम लोगों व क्षेत्र में काम करने वाले प्रवासियों की सुरक्षा पर किस तरह पड़ता है।

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