पाकिस्तान की अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने की कोशिश बेकार हो गई है। ईरान का प्रतिनिधिमंडल शनिवार शाम इस्लामाबाद से रवाना हो गया और उसने अमेरिका के साथ सीधी बात करने से साफ मना कर दिया। इस वजह से पाकिस्तान की दूसरी दौर की बातचीत कराने की योजना पूरी तरह फेल हो गई है।
📰: ईरान के विदेश मंत्री का पाकिस्तान दौरा, अमेरिका के साथ बातचीत की चर्चा, ओमान का भी है इसमें बड़ा रोल।
ईरान ने अमेरिका से बात करने से क्यों मना किया?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi शुक्रवार शाम इस्लामाबाद पहुंचे थे और शनिवार शाम वहां से वापस चले गए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने साफ किया कि इस यात्रा के दौरान अमेरिका के साथ किसी भी मीटिंग की कोई योजना नहीं थी। ईरान ने अमेरिका से सीधे बात करने के बजाय पाकिस्तान के जरिए अपनी कुछ मांगें भेजी हैं।
- ईरान ने अमेरिका और इसराइल के लिए अपनी शर्तों की एक लिस्ट पाकिस्तान को सौंपी है।
- ईरान की सबसे बड़ी मांग यह है कि अमेरिका Strait of Hormuz पर ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी को हटाए।
- ईरान ने साफ कर दिया कि वह केवल पाकिस्तान के जरिए अपनी बात अमेरिका तक पहुंचाना चाहता है।
इस मीटिंग में कौन शामिल था और आगे क्या होगा?
इस हाई-लेवल मीटिंग में पाकिस्तान की तरफ से प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif, विदेश मंत्री Ishaq Dar, आर्मी चीफ Asim Munir और आंतरिक मंत्री Mohsin Naqvi मौजूद थे। प्रधानमंत्री शरीफ ने इस बातचीत को काफी गर्मजोशी भरा बताया। दूसरी तरफ अमेरिका ने अपने विशेष दूत Steve Witkoff और राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार Jared Kushner को ईरान का पक्ष सुनने के लिए पाकिस्तान भेजा था।
अब ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi अपने राजनयिक दौरे के अगले पड़ाव के रूप में ओमान और रूस जाएंगे। इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता करने की कोशिशें अब खत्म होती दिख रही हैं।