ईरान और इज़राइल के बीच तनाव काफी बढ़ गया है और ईरान ने इज़राइल के कई हिस्सों पर क्लस्टर मिसाइलों से हमला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक इन हमलों में बेन गुरियन एयरपोर्ट के पास काफी नुकसान हुआ है और अब तक पांच लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इज़राइली सेना ने बताया कि ईरान की तरफ से लगातार मिसाइलें दागी जा रही हैं जिन्हें रोकने के लिए सुरक्षा तंत्र काम कर रहा है। क्लस्टर बमों के इस्तेमाल की वजह से बचाव कार्य में काफी मुश्किल आ रही है क्योंकि ये हवा में ही कई टुकड़ों में बंट जाते हैं।

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Ben Gurion Airport पर क्या नुकसान हुआ है?

इज़राइली एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पुष्टि की है कि पिछले कुछ दिनों में ईरानी मिसाइलों का मलबा एयरपोर्ट के अंदर गिरा है। इस मलबे की चपेट में आने से वहां खड़े तीन प्राइवेट विमानों को काफी नुकसान पहुंचा है। बताया जा रहा है कि इनमें से कम से कम एक विमान पूरी तरह से जलकर खाक हो गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि एयरपोर्ट के मुख्य रनवे अभी भी काम कर रहे हैं ताकि इमरजेंसी और सरकारी उड़ानों का संचालन जारी रह सके। इज़राइली सेना ने पहले इस जानकारी पर रोक लगा रखी थी जिसे अब हटा दिया गया है।

हमलों में जान-माल का कितना नुकसान हुआ?

ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों की वजह से अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में एक थाईलैंड का नागरिक है जो इज़राइल के मध्य हिस्से में काम कर रहा था और चार फिलिस्तीनी महिलाएं शामिल हैं जो वेस्ट बैंक इलाके में मौजूद थीं। क्लस्टर मिसाइलों के गिरने से कई जगहों पर मलबे बिखरे हुए पाए गए हैं।

प्रभावित क्षेत्र नुकसान का विवरण
Ben Gurion Airport 3 प्राइवेट एयरक्राफ्ट क्षतिग्रस्त हुए
Rishon LeZion मिसाइल के टुकड़े और मलबा गिरा
West Bank मिसाइल हमले में 4 महिलाओं की मौत
Central Israel 1 थाई नागरिक की मौत हुई
Modi’in और Ginton मिसाइल गिरने की रिपोर्ट मिली

क्या होते हैं क्लस्टर मिसाइल और इनसे खतरा क्यों है?

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ईरान अब बड़ी संख्या में क्लस्टर हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। ये ऐसी मिसाइलें होती हैं जो ज़मीन पर गिरने से पहले ही हवा में फट जाती हैं और छोटे-छोटे बमों को एक बड़े इलाके में फैला देती हैं। इस वजह से इज़राइल का एयर डिफेंस सिस्टम इन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं कर पाता है। इज़राइल में घुसने वाली लगभग आधी ईरानी मिसाइलें इसी क्लस्टर तकनीक वाली बताई जा रही हैं। इससे एयरपोर्ट और रिहायशी इलाकों में नुकसान का खतरा ज्यादा बढ़ गया है।