मध्य पूर्व युद्ध पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का बड़ा बयान, कहा- ताकत और सम्मान के साथ अब खत्म होनी चाहिए जंग.

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 21 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहे इस तनाव और संघर्ष को अब समाप्त कर देना सबसे अच्छा फैसला होगा। उन्होंने यह बात तब कही जब ईरान खुद को एक मजबूत और ताकतवर स्थिति में देख रहा है। मेडिकल प्रोफेशनल्स के साथ हुई एक खास मीटिंग के दौरान उन्होंने साफ किया कि आज पूरी दुनिया ईरान की जीत को मान रही है। राष्ट्रपति ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिकी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर ईरान के स्कूलों, अस्पतालों और जरूरी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है, जिसकी वजह से आज पूरी दुनिया में इसकी आलोचना हो रही है। इस पूरी जानकारी के बारे में आप Saudi Press Agency (SPA) पर जाकर विस्तार से पढ़ सकते हैं।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और संघर्ष की शुरुआत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मौजूदा संघर्ष को Operation Epic Fury का नाम दिया गया है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी। अमेरिका और इजराइल ने मिलकर जब सैन्य हमले किए, तभी से हालात लगातार बिगड़ते चले गए। इस तनातनी के बीच समुद्र में जहाजों की आवाजाही को रोका गया और होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को भी आंशिक रूप से बंद करना पड़ा। इस गंभीर स्थिति को शांत करने के लिए पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में 18 जून 2026 को इस्लामाबाद में एक 14 सूत्रीय समझौता यानी Memorandum of Understanding साइन किया गया था। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य युद्धविराम लागू करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना था। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने जुलाई 2026 में यह कहते हुए इस समझौते को पूरी तरह रद्द कर दिया कि ईरान की तरफ से समुद्री यातायात को लगातार धमकियां मिल रही हैं।
आर्थिक मोर्चे पर बढ़ा तनाव और प्रतिबंध
जैसे-जैसे वक्त बीतता गया, इस जंग का रुख अब पूरी तरह से आर्थिक मामलों की तरफ मुड़ चुका है। अमेरिकी खजाने के मंत्री यानी U.S. Treasury Secretary Scott Bessent ने 20 अगस्त 2026 को यह ऐलान किया कि वॉशिंगटन सरकार बढ़ते दबाव के जरिए ईरानी शासन को पूरी तरह से गिराना चाहती है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी इस बात का समर्थन किया और कहा कि अब यह संघर्ष आर्थिक युद्ध के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। इन तमाम अमेरिकी बयानों के जवाब में ईरान के विदेश मंत्रालय ने 21 अगस्त 2026 को इन अमेरिकी कदमों को सरासर आर्थिक आतंकवाद और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया। ईरान का साफ कहना है कि इस तरह के दबाव से देश झुकने वाला नहीं है और वह अपने अधिकारों के लिए डटकर मुकाबला कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और कूटनीतिक कोशिशें
इस पूरे मामले पर पूरी दुनिया के देशों की राय बंटी हुई नजर आती है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian का कहना है कि सिर्फ पाबंदियां लगाने से किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता है, इसलिए सभी पक्षों को कूटनीतिक रास्तों यानी बातचीत का सहारा लेना चाहिए। दूसरी तरफ, ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ओमान के साथ एक तरजीही व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में लगा हुआ है। इसके अलावा, ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने इराक के साथ आपसी सहयोग को और अधिक गहरा करने की बात कही है। राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इससे पहले 21 मार्च 2026 को भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ बातचीत के दौरान भी तुरंत युद्ध रोकने की अपील की थी। उन्होंने ब्रिक्स देशों से यह आग्रह किया था कि वे आगे आएं और इस चल रही आक्रामकता को रोकने में अपनी एक स्वतंत्र और अहम भूमिका निभाएं। खाड़ी देशों में चल रहे इस तनाव का असर दुनिया भर के बाजारों और आम लोगों की जिंदगी पर साफ तौर पर देखा जा रहा है।